त्रिपुरा से शरणार्थियों को वापस लेने को मिजोरम की नई पहल

आइजोल/अगरतला: उत्तर त्रिपुरा के सात शिविरों में विगत 19 वर्षो से शरण लिए जनजातीय शरणार्थियों को वापस लेने के लिए मिजोरम सरकार ने नई पहल की है। यह जानकारी अधिकारियों ने यहां सोमवार को दी। मिजोरम के अतिरिक्त गृह सचिव लालबिअकजमा ने आइजोल में कहा, "जनजातीय शरणाथिर्यों को त्रिपुरा से मिजोरम लाने के लिए मिजोरम सरकार ने गत सप्ताह केंद्रीय गृह मंत्रालय को विस्तृत योजना सौंपी।"

उन्होंने कहा कि योजना को केंद्रीय गृह मंत्रालय से मंजूरी मिलने के बाद रियांग जनजाति शरणार्थियों को पश्चिमी मिजोरम में उनके गांव वापस लाने के लिए नई पहल की जाएगी।

लालबिअकजमा ने कहा कि राज्य सरकार ने जनजातियों के पुनर्वास के लिए केंद्र सरकार से 68 करोड़ रुपये की मांग की है।

उल्लेखनीय है कि मिजोरम से सटे त्रिपुरा के कंचनपुर इलाके में स्थित सात अस्थाई शिविरों में रियांग जनजाति समुदाय के करीब 31,300 लोग अक्टूबर, 1997 से रह रहे हैं। ये अपने को 'ब्रु' भी कहते हैं।

डम्पा टाइगर रिजर्व में एक मिजो वन अधिकारी की हत्या के बाद मिजोरम में हुई जातीय हिंसा के कारण ये लोग भाग गए थे।

प्रभावशाली यंग मिजो एसोसिएशन समेत कई मिजो संगठनों ने मांग की है कि जो लोग राज्य में वापस नहीं आना चाहते हैं, उनका नाम मतदाता सूची से हटा दिया जाए।

मिजोरम के मुख्यमंत्री ललथनहावला ने भी इस मांग का समर्थन किया था।

इस बीच गत सप्ताह त्रिपुरा के कंचनपुर इलाके में हिंसा हुई थी, जब भ्रीगुराम रियांग (36) नामक शरणार्थी ने तालाब मालिक से इजाजत लिए बिना कथित रूप से तालाब से मछली पकड़ी थी। स्थानीय लोगों ने भ्रीगुराम की पिटाई की थी।

बताया जाता है कि बाद में उसने आत्महत्या कर ली।

आक्रोशित शरणार्थियों ने स्थानीय लोगों के 22 घरों को जला दिए थे और क्षति पहुंचाई थी।

सर्वोच्च न्यायालय और केंद्रीय गृह मंत्रालय के निर्देश पर शरणार्थियों को वापस लाने के लिए मिजोरम सरकार ने कई बार पहल की है, लेकिन वे तब तक वापस जाने को इच्छुक नहीं हैं, जब तक उनकी खाद्य और सुरक्षा की मांग पूरी नहीं हो जाती है।

राज्य में सामाजिक-आर्थिक और कानून एवं व्यवस्था की समस्या उत्पन्न होने पर त्रिपुरा सरकार ने केंद्र और मिजोरम सरकार से इन शरणार्थियों को वापस भेजने की मांग की है।

शरणार्थी नेता ब्रुनो मिशा ने कहा कि मिजोरम ब्रु डिसप्लेस्ड पीपुल्स फोरम (एमबीडीपीएफ) वापस लौटने वाले प्रत्येक परिवार को 150,000 रुपये वित्तीय सहायता, दो साल तक मुफ्त राशन, खेती योग्य जमीन देने, जातीय समस्या का राजनीतिक हल और पर्याप्त सुरक्षा देने की मांग कर रहा है।

ब्रुनो ने कहा, "हमने केंद्र और मिजोरम सरकार से कई अवसरों पर कहा है कि अगर सुरक्षा और पुनर्वास समेत 10 सूत्री मांगें मान ली जाती हैं तो शरणार्थी मिजोरम में अपने घर वापस जाने को इच्छुक हैं।"

--आईएएनएस 

 

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