जयललिता आय से अधिक संपत्ति मामले में बरी

Tamil Nadu Chief Minister and AIADMK Supremo J Jayalalithaa addresses a press conference in Chennai on May 16, 2014 Tamil Nadu Chief Minister and AIADMK Supremo J Jayalalithaa addresses a press conference in Chennai on May 16, 2014

बेंगलुरू: कर्नाटक उच्च न्यायालय की एक विशेष पीठ ने सोमवार को ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (एआईएडीएमके) की महासचिव जे.जयललिता को 66.65 करोड़ रुपये के आय से अधिक संपत्ति मामले में बरी कर दिया। निचली अदालत ने उन्हें इस मामले में दोषी ठहराते हुए चार साल कैद की सजा सुनाई थी। निचली अदालत के 27 सितंबर, 2014 के फैसले के खिलाफ 67 वर्षीया जयललिता की याचिका पर बहुप्रतीक्षित फैसला सुनाते हुए न्यायमूर्ति सी.आर. कुमारास्वामी ने उन सभी आरोपों को खारिज कर दिया, जिसमें उन्हें दोषी ठहराते हुए चार साल कैद और 100 करोड़ रुपये जुर्माने की सजा सुनाई गई थी। न्यायमूर्ति ने कहा कि आरोपों में दम नहीं है।

न्यायालय के फैसले के बाद अपनी पहली प्रतिक्रिया में जयललिता ने कहा, "न्याय की जीत हुई। फैसला इस बात का द्योतक है कि न्याय की जीत हुई है।" उन्होंने कहा कि फैसले में मुझे उन सभी आरोपों से बरी कर दिया गया, जो मेरे राजनीतिक दुश्मनों ने लगाए थे।

न्यायाधीश ने निचली अदालत को जयललिता की संपत्ति को मुक्त करने के आदेश दिए, जिसे इस मामले में जब्त कर लिया गया था।

यह मामला 18 सालों तक चला। पहले इस पर तमिलनाडु में सुनवाई हुई और फिर सर्वोच्च न्याायलय के निर्देश पर नवंबर 2002 में इसे बेंगलुरू स्थानांतरित कर दिया गया।

न्यायाधीश ने जयललिता के अतिरिक्त तीन अन्य दोषियों एन. शशिकला, वी.एन. सुधारकरन, जे. ईलासवारसी को रिहा कर दिया, जिन्हें चार साल कैद और 10-10 करोड़ रुपये जुर्माने की सजा सुनाई गई थी।

न्यायाधीश कुमारास्वामी ने खचाखच भरे अदालत कक्ष में कुल 920 पन्नों के फैसले के महत्वपूर्ण हिस्से को पढ़ते हुए कहा, "सभी अपीलों को बरकरार रखा गया है और दोषियों को बरी किया जा रहा है।"

सर्वोच्च न्यायालय ने 17 अक्टूबर, 2014 को जयललिता तथा तीन अन्य को 18 दिसंबर तक के लिए अंतरिम जमानत दे दी थी। बाद में जमानत की अवधि 12 मई तक के लिए बढ़ा दी गई थी।

जयललिता को 27 सितंबर से 17 अक्टूबर तक तीन सप्ताह का समय बेंगलुरू के बाहरी हिस्से में स्थित केंद्रीय कारा में गुजारना पड़ा, क्योंकि उच्च न्यायालय ने सात अक्टूबर को उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी थी। इसके बाद 17 अक्टूबर को सर्वोच्च न्यायालय ने उन्हें जमानत दी।

जयललिता के वकील ने आईएएनएस से कहा, "न्याय सबसे ऊपर है। हमारी अम्मा को राहत मिल गई है और उन्हें अवैध रूप से धन संग्रह करने के मामले सहित सभी आरोपों से बरी कर दिया गया है। रिकॉर्ड चौथी बार मुख्यमंत्री बनने में जयललिता की राह में अब कोई रोड़ा नहीं है।"

जयललिता को न्यायालय द्वारा बरी कर दिए जाने की सूचना मिलने के बाद उनके आवास के बाहर जश्न का माहौल है। न्यायालय के इस फैसले से पार्टी के कार्यकर्ता खुशी से झूम उठे और उन्होंने पटाखे छोड़े। उन्होंने 'अम्मा जिंदाबाद' के नारे लगए और मिठाइयां बांटी।

पार्टी कार्यकर्ताओं और समर्थकों ने उच्च न्यायालय परिसर से करीब एक किलोमीटर दूर क्युबॉन पार्क में पटाखे छोड़े और नाचते-झूमते नजर आए।

अदालत का फैसला पूर्वाह्न करीब 11 बजे आया, जिसके बाद जयललिता तथा मामले में आरोपी बनाए गए तीन अन्य के 10 से अधिक वकीलों ने भी मिठाइयां बांटीं।

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