रचनात्मकता का विकल्प उपलब्ध कराती हैं हास्य फिल्में : पांडिराज

तमिल फिल्मों के निर्देशक पांडिराज कहते हैं कि एक फिल्मकार होने के नाते फिल्मों की हास्य शैली में अलग-अलग विषयों को हास्य के जरिए प्रस्तुत करने का विकल्प होता है। यही कारण है कि राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता पांडिराज ज्यादातर हास्य फिल्में बनाना पसंद करते हैं। पांडिराज ने आईएएनएस को बताया, "मैं रचनात्मक हास्य फिल्में बनाना पसंद करता हूं क्योंकि इस शैली में संवेदनशील मुद्दों को प्रस्तुत कर सकने की आजादी मिलती है। मेरा मानना है कि लोग अपनी परेशानियों और व्यस्तता के बीच थोड़ा समय निकालकर मनोरंजन के लिए फिल्म देखने आते हैं। यदि वास्तविक जिंदगी की तरह फिल्मों को भी निराशाजनक और गंभीर तरीके से पेश किया जाएगा तो निश्चय ही वह इसे नापसंद करेंगे।"

उनकी राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता तमिल हास्य फिल्म 'पासांगा' स्कूली बच्चों के जिद्दी स्वभाव की समस्या और निदान पर आधारित थी। जबकि एक अन्य फिल्म 'मरीना' आजीविका कमाने के लिए चेन्नई के मरीना तट पर काम करने वाले लोगों की जिंदगी के बारे में थी।

पांडिराज की आने वाली फिल्म 'केडी बिल्ला किल्लाडी रांगा' भी हास्य शैली की फिल्म है। त्रिची और चेन्नई में फिल्माई गई फिल्म 29 मार्च को प्रदर्शित हो रही है।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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