वेदांता के तांबा प्रगलन संयंत्र को बंद करने के आदेश

पिछले सप्ताह तूतीकोरीन स्थित स्टरलाइट इंडस्ट्रीज के तांबा प्रगलन संयंत्र से हानिकारक गैस के रिसाव के बाद तमिलनाडु प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (टीएनपीसीबी) ने शुक्रवार को संयंत्र को तत्काल प्रभाव से बंद करने के आदेश दिए। यह तांबा प्रगलन संयंत्र, वेदांता समूह की सहायक कंपनी है।

एक अधिकारी ने बताया कि टीएनपीसीबी ने परियोजना की बिजली आपूर्ति काट दी है।

टीएनपीसीबी द्वारा संयंत्र बंद किए जाने का आदेश देने के बाद पर्यावरण कार्यकर्ता फातिमा बाबू ने तुतीकोरीन से फोन के जरिए आईएएनएस से कहा, "तुतीकोरीन में लोग संयंत्र को बंद किए जाने के आदेश का जश्न मना रहे हैं। उन्हें विश्वास है कि संयंत्र अब हमेशा के लिए पूरी तरह से बंद कर दिया गया है तथा सिर्फ एक अंतरिम उपाय नहीं है।"

उन्होंने कहा, "अगर इस संयंत्र को 23 मार्च की घटना के बाद भी चलता रहने दिया जाता तो जनता विद्रोह कर देती। उन्होंने अपने प्रियजनों को हानिकारक गैस के कारण मिचली, गला रुंधने तथा त्वचा की कई दिक्कतों से जूझते देखा, और यह सब उनके घरों के अंदर भी हो रहा था। अगर संयंत्र को चलता रहने दिया जाता तो स्थिति और भयावह हो सकती थी।"

एक अधिकारी ने तूतीकोरीन से फोन के जरिए आईएएनएस को बताया, "टीएनपीसीबी ने तत्काल प्रभाव से तांबा प्रगलन संयंत्र को बंद करने के आदेश दिए और बिजली विभाग ने शुक्रवार की रात इकाई की बिजली आपूर्ति काट दी। हम इस संयंत्र का कामकाज खत्म करने की प्रक्रिया में लगे हुए हैं।"

अधिकारी के अनुसार संयंत्र को पूरी तरह बंद करने में अभी दो दिनों का और समय लगेगा। इस संयंत्र से सल्फ्यूरिक अम्ल, फास्फोरिक अम्ल, जिप्सम तथा एनोड स्लाइम का भी उत्पादन होता है।

टीएनपीसीबी ने 23 मार्च को संयंत्र से हानिकारक गैस के रिसाव के बाद यह आदेश दिया। गैस रिसाव के कारण अनेक लोगों को मिचली तथा त्वचा की समस्या हो गई थी।

इसके बाद, इसके खिलाफ कई जगह विरोध-प्रदर्शन हुए तथा जिला प्रशासन ने इस घटना की जांच के आदेश दे दिए थे।

तूतीकोरीन से टीएनपीसीबी के एक अधिकारी ने बताया कि टीएनपीसीबी के मुख्य कार्यालय से यह आदेश जारी किए गए हैं। हालांकि टीएनपीसीबी के किसी वरिष्ठ अधिकारी से बातचीत नहीं हो सकी।

इससे पहले मद्रास उच्च न्यायालय ने 2010 में पर्यावरण नियमों का उल्लंघन करने के कारण स्टरलाइट इंडस्ट्रीज के तांबा प्रगलन संयंत्र को बंद करने के आदेश दिए थे। हालांकि कंपनी ने उच्च न्यायालय के इस आदेश को सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती दी थी। अब कंपनी के भविष्य को लेकर सर्वोच्च न्यायालय का निर्णय दो अप्रैल को आने की उम्मीद है।

इंडो-एशियन न्यूज सíवस।

POPULAR ON IBN7.IN