सेलम इस्पात संयंत्र का निजीकरण न करे केंद्र सरकार : पलनीस्वामी

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री के.पलनीस्वामी ने सेलम इस्पात संयंत्र को राज्य सरकार द्वारा प्रोत्साहन राशि प्रदान करने का हवाला देते हुए केंद्र सरकार से अपील की है कि वह संयंत्र का निजीकरण करने की अपनी योजना पर पुनर्विचार करे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को गुरुवार को लिखे एक खत में पलनीस्वामी ने कहा कि राज्य सरकार ने 2,005 करोड़ रुपये की लागत से सेलम इस्पात संयंत्र के विस्तार करने की परियोजना का समर्थन किया, जिसके लिए उसने ऋण, पूंजी सब्सिडी, विद्युत कर में छूट तथा पर्यावरण संरक्षण सब्सिडी के रूप में प्रोत्साह राशि की व्यवस्था की।

उन्होंने कहा, "साल 2015 में, तमिलनाडु सरकार ने सेलम इस्पात संयंत्र को अपनी विस्तार संबंधी गतिविधियों को पूरा करने तथा प्रोत्साहन पैकेज का लाभ उठाने के लिए एक नवंबर, 2010 से 31 अक्टूबर, 2011 तक एक साल की अवधि का विस्तार दिया।"

पलनीस्वामी ने कहा, "प्राथमिकी तौर पर सरकारी क्षेत्र की कंपनी होने के कारण जब सेलम इस्पात संयंत्र को उसकी स्थापना तथा विस्तार को लोगों व तमिलनाडु सरकार का भरपूर समर्थन मिला, ऐसे में भारत सरकार द्वारा संयंत्र के प्रस्तावित निजीकरण को लेकर राज्य के लोगों के बीच शंका और निराशा है।"

उन्होंने कहा, "सेलम इस्पात संयंत्र के कब्जे में जमीन शायद सबसे कीमती तथा मांग वाली संपत्ति है।"

पलनीस्वामी के मुताबिक, राज्य सरकार ने सेलम जिले में कंजामलाई की पहाड़ियों के निचले हिस्से में नौ गांवों से 15.5 वर्ग किलोमीटर जमीन का अधिग्रहण किया था।

मुख्यमंत्री ने कहा, "इस तरह का व्यापक भू अधिग्रहण संयंत्र के सरकारी होने की वजह से ही संभव है। आज की तारीख में, सेलम इस्पात संयंत्र का निजीकरण करने के किसी भी प्रस्ताव से लोग भड़क सकते हैं, खासकर वे लोग जिनकी जमीनों का अधिग्रहण किया गया था।"

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