तमिलनाडु के मुख्य सचिव के ठिकानों पर छापे, बर्खास्तगी की मांग

चेन्नई:  आयकर (आईटी) विभाग के अधिकारियों ने बुधवार को तमिलनाडु के मुख्य सचिव पी. रामा मोहन राव के आवास और सचिवालय के कार्यालय में छापा मारा। इसके बाद मुख्य सचिव को तत्काल बर्खास्त करने की मांग शुरू हो गई है। आयकर विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि छापे के दौरान सचिवालय सहित अन्य परिसरों से बड़ी संख्या में नए नोटों में नकदी मिली है।

यह छापेमारी राव से जुड़े विभिन्न ठिकानों, उनके बेटे और तमिलनाडु के मुख्यमंत्री ओ पन्नीरसेल्वम के निजी सचिव रमेश के आवासों पर भी की गई।

विडंबना यह है कि राव के पास सतर्कता आयुक्त और प्रशासनिक सुधार आयुक्त का अतिरिक्त प्रभार भी है।

जानकार सूत्रों ने बताया कि आईटी विभाग ने हाल ही में जे. शेखर रेड्डी, श्रीनिवासालु और प्रेम नामक तीन व्यवसायियों के पास से 177 किलोग्राम सोना, अमान्य घोषित 500 और 1,000 रुपये के पुराने नोटों में 96 करोड़ की नकदी और नए नोटों में 34 करोड़ की नकदी जब्त की थी।

इनमें से ठेकेदार रेड्डी ने तमिलनाडु सरकार के लिए बहुत काम किया हुआ है। सीबीआई ने बुधवार को तीनों को गिरफ्तार कर लिया।

विधानसभा में विपक्षी द्रमुक के नेता एम.के स्टालिन मुख्य सचिव को तत्काल बर्खास्त करने की मांग की।

द्रमुक नेता ने यह भी कहा कि राव की जगह एक नया मुख्य सचिव नियुक्त करना मुख्यमंत्री के लिए अत्याधिक महत्वपूर्ण है।

उन्होंने इस मुद्दे पर मुख्यमंत्री पनीरसेल्वम की ओर से एक विस्तृत बयान की भी मांग की।

इसे राज्य के लिए शर्म की बात बताते हुए पीएमके के संस्थापक एस. रामदॉस ने मुख्य सचिव को तुरंत बर्खास्त करने और उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने की मांग की।

कई आईएएस अधिकारियों की वरिष्ठता को नजरअंदाज कर राव को मुख्य सचिव नियुक्त किया गया था।

भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) के पूर्व अधिकारी और सामाजिक कार्यकर्ता एम. जी. देव सहायम ने आईएएनएस को बताया कि सरकार को भारतीय संविधान के अनुच्छेद 311 के तहत बगैर देर किए किसी आईएएस अधिकारी को बर्खास्त करने का अधिकार है।

देव सहायम ने कहा कि इस छापेमारी ने भानुमति का पिटारा खोल दिया है। सरकार में भ्रष्टाचार, भ्रष्ट नौकरशाहों की मिलीभगत के बगैर नहीं हो सकता।

उन्होंने कहा कि यह छापेमारी आईएएस कैडर के लिए बहुत ही शर्म की बात है।

इस छापे पर पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बुधवार को केंद्र सरकार की कड़ी आलोचना की।

ममता बनर्जी ने इस कदम को प्रतिशोधात्मक, अनैतिक और तकनीकी दृष्टि से अनुचित बताया।

तृणमूल कांग्रेस की प्रमुख ने ट्वीट कर कहा, "पहले अरविंद केजरीवाल के प्रमुख सचिव पर छापेमारी की गई और परेशान किया गया। अब मुझे पता चला है कि तमिलनाडु के मुख्य सचिव के घर पर भी छापेमारी की गई है। प्रतिशोधात्मक, अनैतिक और तकनीकी रूप से अनुचित कार्रवाई क्यों? क्या यह केवल संघीय संरचना को अस्त-व्यस्त करने के लिए है?"

ममता ने यह जानना चाहा कि भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष अमित शाह और अन्य लोगों की संपत्तियों पर छापेमारी क्यों नहीं की जाती है।

ममता ने कहा कि छापेमारी से पहले तमिलनाडु के नेतृत्व को विश्वास में लिया जाना चाहिए था।

  • Agency: IANS