पंजाब विधानसभा में कांग्रेस विधायकों की हैसियत अस्पष्ट

 

 

चंडीगढ़:  सतलज यमुना लिंक नहर के मुद्दे पर सर्वोच्च न्यायालय के फैसले को लेकर इस्तीफा देने वाले पंजाब के 43 विधायकों की स्थिति पर करीब दो महीने बाद भी अनिश्चितता बनी हुई है। सर्वोच्च न्यायालय के फैसले के खिलाफ विरोधस्वरूप कांग्रेस के 42 और एक निर्दलीय विधायक ने गत 11 नवम्बर, 2016 को राज्य विधानसभा से इस्तीफा दे दिया था।

पंजाब विधानसभा के अध्यक्ष चरणजीत सिंह अटवाल ने इस्तीफे को निजी तौर पर सत्यापित करने के लिए विधायकों को मंगलवार (आज) को बुलाया था। उन्होंने कहा कि इस्तीफा देने वाले विधायक उनके समक्ष उपस्थित नहीं हुए और उन्होंने सोमवार को पत्र के जरिए उपस्थित नहीं होने के बारे में सूचित किया था।

पंजाब कांग्रेस विधायक दल के सचिव ए.सी.कौशिक की ओर से पत्र लिख गया था और दस दिनों के समय की मांग करते हुए सूचित किया गया कि संबद्ध विधायक विधानसभा अध्यक्ष के समक्ष उपस्थित नहीं हो सकते हैं।

विधानसभा अध्यक्ष के कार्यालय ने एक बयान जारी कर इस आशय की सूचना मीडिया को दी।

बयान में यह कहा गया है कि परंपरा के अनुरूप अटवाल ने गत साल 20-22 दिसम्बर को संबद्ध विधायकों को अपने कार्यालय में एक बार पहले भी बुलाया था। मकसद यह सुनिश्चित करना था कि विधायकों ने खुद इस्तीफे दिए हैं या नहीं।

लेकिन, उस समय भी कांग्रेस विधायक दल के सचिव ने इसी तरह का पत्र गत 15 दिसंबर को अटवाल को लिखकर सूचित किया था कि इस्तीफा देने वाले विधायक दिल्ली में व्यस्त हैं और वे विधानसभ अध्यक्ष के समक्ष उपस्थित नहीं हो सकते हैं।

विधानसभा अध्यक्ष के कार्यालय से जारी बयान में कहा गया है कि पहले भी दस दिनों का समय देने का निवेदन किया गया था। इसके बाद अध्यक्ष ने विधायकों को दोबारा 3 जनवरी को बुलाया था।

बयान में कहा गया है कि विपक्षी दल के नेता के हस्ताक्षर के साथ विधयकों द्वारा निजी तौर पर लिखित निवेदन करने के बाद ही अगली बैठक का समय निश्चित किया जाएगा।

पंजाब कांग्रेस के अध्यक्ष और अमृतसर से लोकसभा सदस्य अमरिंदर सिंह ने भी सर्वोच्च न्यायालय के फैसले के बाद अपनी संसदीय सीट से इस्तीफा दे दिया था।

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