भोजन के कटोरे पंजाब ने किया खाद्य सुरक्षा अध्यादेश का विरोध

चंडीगढ़: पंजाब में सत्ताधारी शिरोमणि अकाली दल ने खाद्य सुरक्षा अध्यादेश को किसान विरोधी और अधकचरा करार दिया है। केंद्र के इस कदम पर देश के अन्न उत्पादक राज्य ने विरोध जताया है।

पंजाब के राजस्व मंत्री बिक्रम सिंह मजीठिया ने कहा कि कांग्रेस नीत संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) सरकार का आम चुनाव के मौके पर आम जनता को झांसा देने के लिए अधकचरा राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा विधेयक को मंजूरी देने से भी, आजादी के बाद की भ्रष्टतम सरकार का हित नहीं सधने वाला है।

देश के भौगोलिक क्षेत्र का महज 1.54 प्रतिशत हिस्से वाला एक छोटा-सा राज्य होने के बावजूद पंजाब अकेले राष्ट्रीय खाते में 50 प्रतिशत खाद्यान्न का योगदान करता है। 1960 के दशक में राज्य देश में हरित क्रांति का अगुआ बना और देश को खाद्यान्न उत्पादन के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाया।

मजीठिया ने आरोप लगाया कि संप्रग सरकार ने 2007 में शुरू की गई पंजाब सरकार की आटा-दाल योजना से खाद्य सुरक्षा की युक्ति निकाली।

अकाली दल के अध्यक्ष और पंजाब के उपमुख्यमंत्री सुखबीर सिंह बादल के साले मजीठिया ने कहा, "विधेयक (खाद्य सुरक्षा) का मसौदा पंजाब की गठबंधन सरकार की अत्यंत सफल आटा-दाल योजना की कमजोर कार्बन कॉपी है। संप्रग सरकार ने कभी भी गरीबों का ध्यान नहीं रखा और महंगाई रोकने पर ध्यान नहीं दिया, जिससे आम आदमी का जीवन दुरूह हो गया।"

मजीठिया ने दावा किया, "प्रति व्यक्ति पांच किलो चावल, गेहूं या मोटे अनाज देने के प्रस्ताव से कोई समाधान नहीं होने जा रहा। पंजाब सरकार अपने सीमित साधनों से 2007 से 16 लाख परिवारों को 35 किलोग्राम गेहूं और चार किलोग्राम दाल मुहैया करा रही है। इस योजना पर राज्य सरकार ने करोड़ों रुपये खर्च किए हैं।"

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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