पंजाब में कैप्टन सरकार में मंत्री नवजोत सिंह सिद्धू क्यों हैं 'आहत'

चंडीगढ़: क्रिकेट करियर के दौरान कभी कप्तान अजहरुद्दीन से नाराज होकर इंग्लैंड का दौरा बीच में ही छोड़कर आने वाले नवजोत सिंह सिद्धू  कांग्रेस में भी नाराज हैं. मामला अमृतसर के मेयर को लेकर है. करमजीत सिंह रिंटू को नगर निगम के कांग्रेसी पार्षदों द्वारा सर्वसम्मति से अमृतसर का मेयर चुन गया था. लेकिन ये नवजोत सिंह सिद्धू को रास नहीं आ रहा है. पंजाब सरकार में स्थानीय निकाय मंत्री नवजोत सिंह सिद्धू अमृतसर मेयर के चुनाव कार्यक्रम में भी मौजूद नहीं थे बताया जा रहा है कि कार्यक्रम में आमंत्रित नहीं किए जाने को लेकर सिद्धू नाराज हैं. 


उन्होंने कहा था, ‘‘स्वर्ण मंदिर या दुर्गियाना मंदिर के अलावा मैं कभी कहीं बिना बुलाए नहीं जाता.’’ गौरतलब है कि सिद्धू और रिंटू के बीच रिश्ते अच्छे नहीं रहे हैं. वरिष्ठ उप महापौर बक्षी के साथ भी उनका रिश्ता कुछ अच्छा नहीं रहा, जिन्होंने सिद्धू के ‘‘लापता’’ होने की खबर वाले पोस्टर चिपकवाए थे, जब वह भाजपा में थे. इतना ही नहीं नवजोत सिंह सिद्धू तो यहां तक भी कह चुके हैं कि वह महापौर पदों के उम्मीदवारों के चयन में राज्य सरकार और पार्टी द्वारा उनकी राय नहीं लिये जाने से ‘‘बहुत आहत’’ हैं. उन्होंने कहा कि वह स्थानीय निकाय मंत्री हैं और वह इस मामले में किसी स्तर पर निर्णयों में शामिल नहीं रहे. 

हालांकि उनका कहना था, 'मैं करमजीत सिंह रिंतू के अमृतसर के महापौर के रूप में निर्वाचित होने के खिलाफ उन्हें कोई समस्या नहीं हैं. लेकिन मैं न तो पटियाला, जालंधर और अमृतसर के महापौरों के चुनाव के सिलसिले में पिछले एक महीने से सरकार के स्तर पर चले विचार विमर्श में शामिल रहा और न ही पार्टी के स्तर पर इस संबंध में मुझसे कोई राय ली गई.' आपको बता दें कि कांग्रेस में शामिल होने के बाद वह कई मुद्दों पर कांग्रेस से नाराज हो चुके हैं. केबल बिल के मुद्दे पर भी वह पंजाब सरकार से नाराज हो चुके हैं.
 

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