गुरदासपुर लोकसभा उपचुनाव: बीजेपी नेताओं ने खुद बताए हार के सबसे बड़े कारण...

गुरदासपुर: पंजाब के गुरदासपुर उप चुनाव के आए नतीजे बीजेपी को जोरदार झटका लगा है. कांग्रेस के कैंडिडेट सुनील जाखड़ ने 1,93,219 वोटों से जीत हासिल की. बीजेपी के लिए दुखद खबर इसलिए है कि क्योंकि गुरदासपुर लोकसभा सीट बीजेपी का गढ़ मानी जाती रही है. कांग्रेस प्रत्याशी सुनील जाखड़ की जीत के बाद बीजेपी खेमें में मायूसी का आलम है, तो वहीं कांग्रेस पार्टी में जश्न का माहौल है. जाखड़ ने शुरू से ही बढ़त बनाई हुई थी. उनकी बढ़त से कांग्रेस की जीत तय मानी जा रही थी, महज औपचारिकता बाकी थी.

वहीं, पंजाब के कैबिनेट मंत्री नवजोत सिंह सिद्धू ने जाखड़ की जीत को दिवाली का उपहार बताया है. उन्होंने कहा कि पंजाब की जनता ने इस जीत से कांग्रेस उपाध्‍यक्ष राहुल गांधी को दिवाली का गिफ्ट दिया है. उन्‍होंने इस दौरान अकाली दल के प्रधान सुखबीर सिंह बादल पर भी कड़े हमले किए. सिद्धू कहा कि यह जीत कांग्रेस कार्यकर्ताओं की जीत है. उन्‍होंने कहा कि कांग्रेस की इस भारी जीत से पंजाब में भाजपा और अकाली दल की कमर टूट गई है. गुरदासपुर लोकसभा सीट भाजपा का गढ़ रहा है, लेकिन वो कौन से कारण है जिससे भाजपा के गढ़ में उसकी यह हालात हो गई है.

बीजेपी नेताओं के मुताबिक हार के प्रमुख कारण...

- पंजाब में कांग्रेस की सरकार बनने के बाद पहला चुनाव था, सरकार ने पूरी ताकत लगाई

- कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष ने चुनाव लड़ा इसलिए पूरी पार्टी एकजुट होकर लड़ी

- बीजेपी का उम्मीदवार चयन सही नहीं था. चुनावों के बीच अकाली दल नेता और बीजेपी उम्मीदवार पर आरोप लगने से मामला बिगड़ा.

- कविता खन्ना को लड़ाना सही नहीं होता, क्योंकि उन्हें बाद में उतारा जा सकता है.

- जीएसटी को लागू करने से आ रही दिक्कतों से व्यापारी वर्ग नाराज था.

- विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने 23 सीटें लड़ी थीं और सिर्फ 3 जीती थीं

- विनोद खन्ना को आम आदमी पार्टी के मुकाबला त्रिकोणीय बनाने से फायदा मिला था. इस बार आप उम्मीदवार की जमानत जब्त हो गई.

गुरदासपुर लोकसभा सीट पर भाजपा के टिकट से विनोद खन्ना लगातार तीन बार सांसद चुने गए थे. इसके बाद 2009 के चुनाव में वह कांग्रेस के प्रताप सिंह बाजवा से हार गए थे, लेकिन पीछले आम चुनाव में विनोद खन्ना ने प्रताप सिंह बाजवा को करीब सवा लाख मतों के अंतर से मात दी थी.

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