वकील ने कहा- वेश्याओं की भी शादी कराते हैं राम रहीम, जज बोले- यह जंगली हैवान माफी के लायक नहीं

सीबीआई अदालत के जज जगदीप सिंह सोमवार (28 अगस्त) को रोहतक स्थित सुनेरिया जेल में हेलीकॉप्टर से बलात्कार के दोषी गुरमीत राम रहीम को सजा सुनाने पहुंचे। उन्होंने दो साध्वियों के बलात्कार और आपराधिक साजिश के लिए डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम को दोनों मामलों के लिए अलग-अलग 10-10 साल “कठोर कारावास” की सजा सुनाई। अदालत ने गुरमीत राम रहीम को दोनों साध्वियों को 14-14 लाख रुपये हर्जाने के तौर पर भी देने का आदेश दिया है।  गुरमीत राम रहीम को ये दोनों सजाएं अलग-अलग काटनी होंगी यानी उसे 20 साल जेल में रहना होगा। सजा से पहले अभियोजन के वकील ने अदालत से कहा कि ये मामला “बंधक बनाकर रेप करने का है”, वहीं गुरमीत राम रहीम के वकील ने कहा कि उनका मुवक्किल “सामाजिक कार्य” करता है और वो लोगों को “यहाँ तक कि वेश्याओं को भी विवाह के लिए प्रेरित करता है।”

गुरमीत राम रहीम को अदालत ने 25 मई को रेप का दोषी करार दिया था। सोमवार (28 अगस्त) को उसकी सजा पर फैसला होना था। फैसले से पहले बचाव और अभियोग पक्ष की दलीलें सुनने के बाद ही जज सजा सुनाते हैं। सोमवार को सीबीआई के वकील ने अदालत से कहा कि डेरा प्रमुख द्वारा किया गया रेप सामान्य नहीं ये “कस्टोडियल रेप” (किसी को बंधक बनाकर रेप करना) है। सीबीआई वकील ने कहा कि गुरमीत राम रहीम के कृत्य का “व्यापक सामाजिक प्रभाव पड़ेगा।” सीबीआई के वकील ने अदालत से कहा, “दोषी अधिकतम सजा का हकदार है। वो बहुत ही प्रभावशाली है और उसे वाजिब सजा दी जाने चाहिए ताकि ऐसे लोगों को कड़ा संदेश दिया जा सके….अधिकतम सजा से कम सजा दिए जाने पर देश की सामूहिक चेतना को धक्का लगेगा।”

गुरमीत राम रहीम के वकील ने अदालत से कहा कि उनका मुवक्किल लोगों को सामाजिक कार्य करने के लिए “प्रेरित” करता है और “वृक्षारोपण” और “वेश्याओं का विवाह” जैसे सामाजिक कार्य करता रहा है। गुरमीत राम रहीम के वकील ने कहा, “दोषी ने ज्यादातर सामाजिक कार्य हरियाणा में किए हैं, खासकर तब जब हरियाणा सरकार ऐसे काम करने में विफल रही….दोषी की कुशल निगरानी में 133 सामाजिक कल्याण कार्यक्रम जारी हैं…दोषी ने लोगों को विवाह के लिए प्रेरित किया है, यहाँ तक कि वेश्याओं को भी और नशामुक्ति के लिए भी उसने सराहनीय काम किया है।” गुरमीत राम रहीम के वकील ने अदालत से स्वास्थ्य आधार पर भी नरमी बरतने की अपील की। गुरमीत राम रहीम के वकील ने अदालत से कहा कि वो पिछले आठ सालों से हाइपरटेंशन, एक्यूट डाइबिटीज और पीठ की दर्द से पीड़ित है और “लंबी कैद” से उसके स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा।

सजा की मियाद पर दोनों पक्षों की दलील सुनने के बाद जज जगदीप सिंह ने अपने फैसले में कहा कि गुरमीत राम रहीम “अदालत की सहानुभूति” का हकदार नहीं है क्योंकि पीड़िताएं उसे “भगवान” का दर्जा देती थीं और उसकी “पूजा” करती थीं। अदालत ने फैसले में कहा कि गुरमीत राम रहीम ने अपनी शिष्या पवित्र साध्वियों को भी नहीं छोड़ा और जंगली जानवर की तरह बरताव किया।” अदालत ने अपने फैसले में कहा कि गुरमीत राम रहीम के कृत्य से इस प्राचीन देश की संस्कृति को ऐसी क्षति पहुंची है जिसकी भरपाई नहीं की जा सकती। अदालत ने कहा कि गुरमीत राम रहीम के कृत्य से पवित्र, आध्यात्मिक, सांस्कृतिक और धार्मिक संस्थाओं की छवि धूमिल हुई है। सीबीआई अदालत ने अपने फैसले में सुप्रीम कोर्ट के उस टिप्पणी का भी जिक्र किया जिसमें कहा गया था कि "अभियुक्त को इसे आत्मसात करना चाहिए कि उसने केवल पीड़िता की जिंदगी को दागदार नहीं किया बल्कि उसने पूरे सामाजिक तानेबाने को छिन्न-भिन्न किया है।" अदालत ने अपने फैसले में महात्मा गांधी के उद्धरण का भी जिक्र किया जिसमें उन्होंने कहा है कि महिला का साहस पुरुष से श्रेष्ठ होता है और उसके बिना पुरुष नहीं रह सकता।

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