हरियाणा सरकार ने मानी चूक, डीसीपी को किया निलंबित, कहा-उन्होंने गलत आदेश दिया था

डेरा सच्चा सौदा के अनुयायियों द्वारा शुरू की गई हिंसाओं को रोकने में नाकाम रहने को लेकर आलोचनाओं का सामना कर रही हरियाणा सरकार ने शनिवार को यह कहते हुए पंचकूला के पुलिस उपायुक्त (डीसीपी) को निलंबित कर दिया कि उनके एक दोषपूर्ण आदेश के कारण जिले में भारी भीड़ जमा हुई। हरियाणा के अतिरिक्त मुख्य सचिव (गृह) राम निवास ने कहा, ‘‘हां चूक हुई है और इसलिए हमने पंचकूला के डीसीपी को निलंबित कर दिया।’’ उन्होंने बताया कि अधिकारी ने जो निषेधाज्ञा जारी की थी उसके तहत केवल हथियार रखने पर रोक लगी थी और पांच या उससे ज्यादा लोगों के एक जगह जमा होने पर रोक नहीं लगी।

यह हाल तब हुआ, जब हिंसा की आशंका को देखते हुए पहले ही राज्य सरकार द्वारा हरियाणा पुलिस को उत्तेजित डेरा अनुयायियों के खिलाफ रक्षा की पहली पंक्ति में तैनात किया गया था। लेकिन पुलिस कर्मियों ने लगभग अपने कर्तव्य को लगभग त्याग दिया और जब भीड़ ने पत्थरों और लाठियों से हमला किया, तो वे खुद अपनी जान बचाने के लिए भाग गए। इस दौरान भीड़ ने निजी और सरकारी कारों सहित कई वाहनों को आग लगा दिया। पुलिस और फायर ब्रिगेड वाहनों को भी जला दिया गया।

बाद में मामले की लीलापोती करते हुए एक आधिकारिक आदेश में शनिवार को कहा गया कि पंचकूला के डीसीपी, आईपीएस अधिकारी अशोक कुमार को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया। हरियाणा पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) बी.एस. संधू ने कहा कि सभी डेरा अनुयायियों को बाहर कर दिया गया है और अब पंचकूला ‘बिल्कुल सुरक्षित’ है।

पंचकूला की एक विशेष सीबीआई अदालत ने कल डेरा प्रमुख गुरमीत राम रहीम सिंह को बलात्कार के एक मामले में दोषी करार दिया था जिसके बाद डेरा अनुयायियों ने शुक्रवार को यहां जबदस्त उत्पात मचाया। जिसमें कई की मौत हो गई, 200 से अधिक घायल हो गए तथा करोड़ों की संपत्तियों को नुकसान पहुंचा। पंचकूला में रात में हुई हिंसा के बाद शनिवार सुबह सारे प्रतिष्ठान बंद रहे, सड़कों पर जले हुए वाहन नजर आ रहे थे। डेरा प्रमुख को साल 2002 में दो महिलाओं के साथ दुष्कर्म के आरोप में शुक्रवार को दोष सिद्ध पाया गया, जिसके बाद डेरा समर्थकों द्वारा की गई हिंसा और उत्पात में कम से कम 30 लोगों की मौत हो गई, जिसमें से 29 की मौत पंचकूला में हुई।

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