ओडिशा, बंगाल में मीठे रसगुल्ले पर कड़वा विवाद

कोलकाता: मीठे रसगुल्ले की मिठास को फीका करते हुए ओडिशा और बंगाल के बीच उस पर स्वामित्व का विवाद काफी कड़वे स्तर पर पहुंच गया है। ओडिशा के ताजा दावे के बीच कि मिठासभरा यह स्वादिष्ट पकवान 600 वर्ष पूर्व सबसे पहले वहां निर्मित हुआ था, पश्चिम बंगाल के एक मंत्री ने फिर से इस पर पश्चिम बंगाल के अधिकार का दावा किया है।

पश्चिम बंगाल के विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्री रबिरंजन चट्टोपाध्याय ने रविवार को आईएएनएस से कहा, "गुल्ला यानी गोल मिठाइयां बंगाल की खासियत हैं। ओडिशा ने हालांकि कहा है कि यह 600 वर्ष पूर्व सबसे पहले वहां निर्मित हुआ था, लेकिन उन्होंने इसका कोई प्रमाण नहीं दिया है।"

ओडिशा सरकार ने रसगुल्ले के सबसे पहले राज्य में बनने से संबंधित प्रमाण जुटाने के लिए तीन समीतियां बनाई हैं।

ओडिशा का दावा है कि रसगुल्ला 12वीं शताब्दी में सबसे पहले पुरी के जगन्नाथ मंदिर में परोसा गया था, जबकि बंगाल इसे 150 वर्ष पुराना बता रहा है।

पश्चिम बंगाल ने पहले ही रसगुल्ले पर अधिकार का दावा पुख्ता करने के लिए एक भौगोलिक संकेतक (जीआई) चिन्ह के लिए अर्जी दे दी है।

पश्चिम बंगाल का दावा है कि नबीन चंद्र दास ने सबसे पहले 1868 में यह मिठाई बनाई थी।

चट्टोपाध्याय के मुताबिक, "पर्याप्त प्रमाण हैं कि यह बंगाल में बना है।"

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

 

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