दुनियाभर में ओडिशी को बढ़ावा दे रहे रामली इब्राहिम

नई दिल्ली:  रामली इब्राहिम के ओडिशी के प्रति प्रेम के बीच भारत और मलेशिया के बीच की दूरी दीवार नहीं बन सकी। बल्कि वह अपने देश में ओडिशी (नृत्य शैली) को बढ़ावा दे रहे हैं। ओडिशी के लिए उन्हें कई शीर्ष पुरस्कारों से नवाजा भी जा चुका है।

2011 में भारतीय राष्ट्रपति ने रामली को संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार से नवाजा है। उन्होंने अमेरिका और भारत सहित दुनियाभर में ओडिशी नृत्य की पेशकश की है।

सूत्र डांस फाउंडेशन के अध्यक्ष रामली ने आईएएनएस को बताया, "मैं भारत में 25 सालों से अधिक समय से प्रस्तुतियां दे रहा हूं। मैं क्वालालंपुर में रहता हूं।"

रामली एशियाई भारतीय सांस्कृतिक संबंधों पर आधारित दो दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए भारत में थे।

उन्होंने कहा कि उनका ओडिसी का प्रचार करना इसका बात का प्रमाण है कि एशियाई भारतीय सांस्कृतिक संबंध बने हुए हैं।

रामली ने दिवंगत गुरु देबप्रसाद दास से यह नृत्य शैली सीखी।

उन्होंने कहा, "हमने मलेशिया में भारतनाट्यम की तरह ओडिशी को एक प्रमुख नृत्य शैली बना दिया है। हम मलेशिया में ओडिशी त्योहार मनाते हैं।"

"हमारे प्रयासों से 10 से अधिक संस्थान ओडिशी सिखा रहे हैं।"

अब मलेशियाइ, चीनी और भारतीय-चीनी लोग ओडिशी ज्यादा सीख रहे हैं।

रामली ने दिल्ली के पुराना किला, कमानी ऑडिटोरियम और आजाद भवन जैसे कई स्थानों पर यह नृत्य कार्यक्रम पेश किए हैं।

रामली कहते हैं, "मैंने अपनी टीम के साथ 1985 से लेकर अब तक 40 से अधिक शहरों में प्रस्तुति दी है।" रामली को 2010 में क्वालालंपुर में पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के दौरे के दौरान विशेष प्रस्तुति दी थी।

रामली ने कहा, "भारत और दक्षिणपूर्व एशिया के बीच पुराने संबंध अभी भी जारी है और कोई भी इन्हें नजरअंदाज नहीं कर सकता।"

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