पॉस्को परियोजना की जमीनें वापस ले रहे किसान

भुवनेश्वर:  ओडिशा में दक्षिण कोरियाई स्टील कंपनी पॉस्को की 12 अरब डॉलर की परियोजना खटाई में पड़ने के बाद किसानों ने अपनी अधिगृहीत जमीन को वापस लेना शुरू कर दिया है। भूमि अधिग्रहण के विरोध में आंदोलन करने वाली किसान पॉस्को प्रतिरोध संग्राम समिति (पीपीएसएसएस) ने सोमवार को यह जानकारी दी। पीपीएसएस अध्यक्ष अभय साहू ने कहा कि पॉस्को इंडिया ने परियोजना को बंद करने का मन बना लिया है, लेकिन पीपीएसएस का आंदोलन तब तक जारी रहेगा, जबतक किसानों की अधिगृहीत सभी जमीनें वापस उन्हें नहीं मिल जाती और आंदोलकारियों के विरुद्ध दर्ज झूठे मामले बिना शर्त वापस नहीं लिए जाते।

साहू ने आईएएनएस से कहा, "राज्य सरकार ने लोगों से जमीनें जबरदस्ती ली थी। लेकिन ग्रामीण अपनी जमीनों को वापस लेने के लिए प्रतिबद्ध हैं, जो उनके पुरखों की थी।"

उन्होंने कहा कि नुआगांव के ग्रामीणों ने अपनी जमीनों को वापस लेना शुरू कर दिया है, जिसे सरकार ने प्रस्तावित पॉस्को परियोजना के लिए ली थी।

उन्होंने यह भी मांग की कि पॉस्को को ओडिशा में 10 सालों के दौरान 350 करोड़ रुपये के खर्च का विस्तृत विवरण देना चाहिए।

साहू ने कहा कि परियोजना पर विरोध करने को लेकर ग्रामीणों पर 300 झूठे मामले दर्ज किए गए। उन्होंने सभी मामलों को तत्काल वापस लेने की मांग की।

पॉस्को समर्थक एक नेता तमिल प्रधान ने आईएएनएस से कहा, "हम राज्य सरकार से अपील करते हैं कि वह पॉस्को परियोजना को प्रभावित करने वाले मुद्दों का जितनी जल्दी हो सके समाधान करे, नहीं तो हमें अपनी जमीनों को वापस लेने को मजबूर होना पड़ेगा, क्योंकि यह हमारी आजीविका का महत्वपूर्ण आधार है।"

वहीं, राज्य सरकार के एक अधिकारी ने पहचान जाहिर न करने की शर्त पर कहा कि वे किसानों द्वारा जमीनें वापस लेने से अवगत हैं, लेकिन प्रशासन से कोई कदम उठाने के लिए अभी कोई निर्देश नहीं मिला है।

उल्लेखनीय है कि दक्षिण कोरियाई कंपनी ने बीते 10 सालों के दौरान कोई प्रगति न होने पर परियोजना को ठंडे बस्ते में डालने की घोषणा की है। उसने ओडिशा सरकार के साथ साल 2005 में इस परियोजना के लिए एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किया था।

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