ओडिशा में किशोरों के उत्पीड़न पर जांच के आदेश

भुवनेश्वर : ओडिशा में रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) के जवानों द्वारा कथित रूप से दो किशोरों को अवैध तरीके से गिरफ्तार कर सात दिनों तक प्रताड़ित करने का मामले में रेलवे प्रशासन ने बुधवार को जांच के आदेश जारी किए हैं। अधिकारियों ने यह जानकारी दी। पूर्वी तटीय रेलवे के मुख्य सुरक्षा आयुक्त एस. के. मिश्रा ने आईएएनएस को बताया, "मैंने वरिष्ठ प्रभागीय सुरक्षा आयुक्त और उनके अधीनस्थ अधिकारियों द्वारा मामले की जांच किए जाने और मामले की तह तक जाकर दोषी आरपीएफ अधिकारियों के खिलाफ उचित कार्रवाई करने के आदेश दिए हैं।

अधिकारियों को 14 जनवरी तक कार्रवाई की रिपोर्ट सौंपने को कहा गया है।

कटक के जिलाधिकारी एस. एन. गिरिश ने आईएएनएस को बताया, "दोनों लड़कों को छुड़ाकर उनके घर भेज दिया गया है। आगे की जांच चल रही है।"

14 वर्षीय बिकाश और 12 वर्षीय लोकनाथ को बाल सुरक्षा अधिकारियों ने मंगलवार को कटक के आरपीएफ पुलिस थाने से छुड़ाया।

कथित रूप से दो किशोरों को थाने में बंद कर प्रताड़ित करने का मामला तब सामने आया, जब किशोरों के परिजनों द्वारा सूचित किए जाने पर कुछ स्थानीय मीडिया कर्मी आरपीएफ पुलिस थाने पहुंचे और प्रशासन को इस बारे में सूचित किया।

शहर की झोपड़पट्टी इलाके में रहने वाले दोनों किशोरों ने अधिकारियों को बताया कि उन्हें आरपीएफ के लॉकअप में 31 दिसंबर को बंद किया गया था।

जिला बाल सुरक्षा कार्यालय के प्रगति मोहंती ने आईएएनएस को बताया, "उन्होंने आरपीएफ के जवानों पर शारीरिक और मानसिक रूप से प्रताड़ित करने का आरोप लगाया है। हमें भी उनके शरीर पर जख्मों के निशान मिले हैं।"

कानून के मुताबिक थाने में शिकायत दर्ज हुए बिना किसी भी व्यक्ति को हिरासत में नहीं लिया जा सकता है और गिरफ्तार किए गए व्यक्ति को हिरासत में लिए जाने के 24 घंटे के अंदर अदालत के समक्ष पेश किया जाना अनिवार्य है।

मोहंती ने बताया कि आरपीएफ के अधिकारियों का कहना है कि उन्होंने दोनों लड़कोंे को रेलगाड़ियों से मोबाइल फोन और दूसरी चीजें चुराने के मामले में गिरफ्तार किया है, लेकिन अधिकारी साक्ष्य के रूप में लड़कों के खिलाफ दर्ज शिकायत पेश करने में असफल रहे।

मोहंती ने आगे कहा कि यहां तक कि आरपीएफ ने मामले की जांच के लिए दोनों लड़कों को राजकीय रेलवे पुलिस बल को भी नहीं सौंपा।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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