दिल्ली दुष्कर्म : 2 दोषियों के मृत्युदंड पर रोक

नई दिल्ली: सर्वोच्च न्यायालय ने सोमवार को दिल्ली दुष्कर्म मामले में दो दोषियों विनय शर्मा और अक्षय ठाकुर को मिले मृत्युदंड के क्रियान्वयन पर रोक लगा दी। न्यायालय ने इससे पहले 15 मार्च को अपने फैसले में दो अन्य दोषियों -मुकेश और पवन गुप्ता- के मृत्युदंड के क्रियान्वयन पर रोक लगा दी थी।

न्यायमूर्ति रंजना प्रकाश देसाई और न्यायमूर्ति एन. वी. रामना की पीठ ने 15 मार्च को दिए गए आदेश का हवाला देते हुए कहा, "हमें वही आदेश पारित करना पड़ा।" विनय शर्मा और अक्षय ठाकुर के वकील ने मृत्युदंड के क्रियान्वयन को रोकने की अपील की थी।

न्यायालय ने यह कहकर विनय और अक्षय की याचिका पर आदेश पारित करने से इनकार कर दिया कि सर्वोच्च न्यायालय के कानूनों में हुए संशोधन के मद्देनजर उनकी याचिका की सुनवाई तीन न्यायाधीशों वाली पीठ को करनी चाहिए।

उन्होंने एक समाचारपत्र में मुख्य न्यायाधीश आर. एम. लोढ़ा के प्रकाशित बयान के हवाले से कहा था कि राष्ट्रपति ने संशोधन कानूनों को मंजूरी दे दी है और 16 अगस्त से मृत्युदंड से संबंधित सभी मामलों की सुनवाई तीन न्यायाधीशों की पीठ करेगी।

न्यायालय ने हालांकि आदेश पारित करने से इनकार करते हुए कहा कि संशोधन कानूनों को लागू किया जाना बाकी है।

न्यायालय ने 15 मार्च को मुकेश और पवन गुप्ता के मृत्युदंड का क्रियान्वयन रोकने का फैसला सुनाया था। दोनों ने 13 मार्च को दिल्ली उच्च न्यायालय द्वारा सुनाए गए उस फैसले को चुनौती दी थी, जिसमें फास्ट-ट्रैक अदालत द्वारा सुनाए गए मृत्युदंड की सजा को बरकरार रखा गया था।

न्यायमूर्ति रंजना प्रकाश देसाई और न्यायमूर्ति शिव कीर्ति सिंह ने न्यायालय की विशेष कार्यवाही में उनका मृत्युदंड का क्रियान्वयन स्थगित करने का फैसला सुनाया।

दिल्ली उच्च न्यायालय की न्यायमूर्ति रेवा खेत्रपाल और न्यायमूर्ति प्रतिभा रानी की पीठ ने सामूहिक दुष्कर्म के चार आरोपियों मुकेश, पवन, विनय और अक्षय को सुनाई गई मृत्युदंड की सजा को बरकरार रखा था।

उल्लेखनीय है कि 16 दिसंबर, 2012 को छह लोगों ने दिल्ली में चलती बस में एक युवती के साथ सामूहिक दुष्कर्म के बाद उसको गंभीर रूप से घायल कर दिया था। पीड़िता ने 29 दिसंबर, 2012 को सिंगापुर के माउंट एलिजाबेथ अस्पताल में इलाज के दौरान दम तोड़ दिया था।

एक आरोपी राम सिंह ने दिल्ली के तिहाड़ जेल में आत्महत्या कर ली थी, जबकि मामले में एक नाबालिग आरोपी को अदालत ने तीन साल के लिए सुधार गृह में भेज दिया था।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

 

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