दिल्ली दुष्कर्म मामला : मुख्य आरोपी राम सिंह ने की खुदकुशी

नई दिल्ली, 11 मार्च (आईएएनएस)| राष्ट्रीय राजधानी में 16 दिसंबर, 2012 की रात चलती बस में 23 साल की युवती के साथ हुए सामूहिक दुष्कर्म के मामले में मुख्य आरोपी राम सिंह ने सोमवार सुबह फांसी लगाकर खुदकुशी कर ली। परिजनों और बचाव पक्ष के वकील ने हालांकि हत्या व साजिश की आशंका जताते हुए मामले की पूरी जांच कराने की मांग की है। राम सिंह की जेल में खुदकुशी को लेकर जहां लोगों ने जेल प्रशासन पर सवाल उठाए हैं, वहीं पीड़िता के भाई ने खुदकुशी पर हैरानी जताई है, लेकिन उसने जेल प्रशासन पर कोई सवाल नहीं उठाए हैं।

जेल अधिकारियों के अनुसार, 35 वर्षीय राम सिंह जेल संख्या तीन के वार्ड नंबर पांच में रखा गया था। उसने चादर का फंदा बनाकर खिड़की के ग्रिल से सुबह 5.45 बजे लटक गया और खुदकुशी कर ली। उसने खिड़की तक पहुंचने के लिए बाल्टी का इस्तेमाल किया, जो कैदियों को स्नान के लिए दी गई है।

राम सिंह के वार्ड में हालांकि तीन अन्य कैदी भी थे, लेकिन उनका कहना है कि उन्होंने उसे खुदकुशी करते नहीं देखा। अधिकारियों ने उन कैदियों की पहचान जाहिर करने से मना कर दिया है।

तिहाड़ जेल की ओर से जारी आधिकारिक बयान में कहा गया है, "विचाराधीन कैदी राम सिंह ने सुबह करीब 5.45 बजे फंदे से लटककर खुदकुशी कर ली। वह 23 दिसंबर, 2012 से जेल संख्या तीन में कैद था।"

बयान के अनुसार, "मामले की जांच न्यायिक अधिकारी द्वारा की जा रही है। जांच अधिकारी की रिपोर्ट मिलने के बाद ही मौत के वास्तविक कारणों का पता चल पाएगा, जिसमें फोरेंसिक विशेषज्ञों द्वारा की गई पोस्टमार्टम रिपोर्ट भी शामिल होगी।"

तिहाड़ जेल के उप महानिरीक्षक (जेल) जी. सुधाकर ने बताया, "उच्च सुरक्षा वाली तिहाड़ जेल में राम सिंह ने कैसे आत्महत्या की, इसका पता लगाने के लिए जांच के आदेश दिए गए हैं।"

राम सिंह के परिजनों ने हालांकि इसे हत्या करार देते हुए केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) से मामले की जांच कराने की मांग की है।

राम सिंह के पिता मांगे लाल ने तिहाड़ जेल के बाहर संवाददाताओं से कहा, "उसे मारा गया और बाद में जेल में फंदे से लटका दिया गया। उसने हमसे कई बार कहा था कि उसे जेल में खतरा है। उसने इस संबंध में शिकायत भी दर्ज कराई थी। यह खुदकुशी नहीं है। हम मामले की सीबीआई जांच की मांग करते हैं।"

राम सिंह के वकील ने भी इस मामले में साजिश की आशंका जाहिर करते हुए इसकी पूर्ण जांच कराने की मांग की है। उन्होंने कहा कि राम सिंह तनाव में नहीं था, जैसा कि जेल अधिकारियों द्वारा बताया जा रहा है।

वहीं, जेल सूत्रों का कहना है कि राम सिंह तथा चार अन्य वयस्क आरोपियों ने जनवरी महीने से ही जेल के अन्य कैदियों से बातचीत बंद कर दी थी, जिसके बाद से खुदकुशी की आशंका के मद्देनजर उन पर नजर रखी जा रही थी। लेकिन व्यवहार सामान्य पाए जाने के बाद इधर उनपर से नजरें थोड़ी ढीली कर ली गई थीं।

राम सिंह पर 16 दिसम्बर की घटना के संबंध में 13 मामले दर्ज किए गए हैं, और त्वरित अदालत में मामले की प्रतिदिन सुनवाई हो रही है। सोमवार को भी अदालत में उसकी पेशी होनी थी।

पीड़िता का भाई राम सिंह की खुदकुशी से हैरान है। हालांकि उसने जेल प्रशासन पर कोई सवाल नहीं उठाए हैं। पीड़िता के 20 वर्षीय भाई ने आईएएनएस से फोन पर कहा, "राम सिंह को सार्वजनिक तौर पर फांसी दी जानी चाहिए थी। राम सिंह को मालूम था कि उसके खिलाफ मजबूत साक्ष्य हैं और उसे मौत की सजा मिल सकती है।"

वकीलों एवं विशेषज्ञों का कहना है कि राम सिंह की खुदकुशी से मामले की सुनवाई पर कोई असर नहीं पड़ेगा।

इस मामले के अन्य चार आरोपियों- पवन (19) और अक्षय (29) को जेल संख्या चार में और विनय (20) तथा मुकेश (26) को जेल संख्या सात में कैद रखा गया है। एक अन्य आरोपी ने खुद के नाबालिग होने का दावा किया है, जिसे अलग रखा गया है।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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