भाजपा कूड़े के ढेर पर कर रही राजनीति : आप

 

नई दिल्ली:  दिल्ली में सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी (आप) ने मंगलवार को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर राजधानी वासियों के स्वास्थ्य की अनदेखी करते हुए दिल्ली में लगे कूड़े के ढेर पर राजनीति करने का आरोप लगाया। आप की दिल्ली इकाई के संयोजक दिलीप पांडेय ने यहां पत्रकारों से कहा कि चूंकि दिल्ली की तीनों नगर निगमों पर भाजपा का नियंत्रण है, इसलिए नगर निगम कर्मचारियों के हड़ताल पर जाने के बाद खड़ी हुई समस्या के लिए उन्हें ही जिम्मेदार ठहराया जाना चाहिए।

उन्होंने कहा, "हमने अपने अधिकार क्षेत्र में आने वाले मुद्दों पर हमेशा जिम्मेदारी ली है और जनता के सवालों का जवाब दिया है। लेकिन जिन मुद्दों के लिए भाजपा जिम्मेदार है, उसके बारे में भाजपा से ही सवाल पूछा जाना चाहिए।"

दिलीप ने पत्रकारों से कहा, "भाजपा दिल्ली वासियों के स्वास्थ्य और जीवन की परवाह न कर कूड़े के ढेर पर राजनीति कर रही है। बात जब नागरिकों के स्वास्थ्य की हो तो इस पर राजनीति नहीं होनी चाहिए।"

उन्होंने बताया कि पिछली सरकारों के मुकाबले आप सरकार दिल्ली महानगर निगम (एमसीडी) को ढाई गुना राशि दे चुकी है।

दिलीप ने बताया, "इसके बावजूद सफाई कर्मियों को उनका वेतन क्यों नहीं दिया जा रहा? क्या पिछले दो वर्ष में सफाई कर्मियों की तनख्वाह ढाई गुना बढ़ चुकी है या एमसीडी कर्मचारियों की संख्या में इतनी वृद्धि हुई है?"

उन्होंने आगे कहा, "अगर सरकार द्वारा दी गई राशि कर्मचारियों को नहीं दी जा रही तो सारा रुपया कहां जा रहा है? भाजपा के शासन में एमसीडी सफाई कर्मियों का शोषण कर रही है।"

उन्होंने यह भी बतया कि एमसीडी के कर्मचारियों ने उप-मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया से सोमवार को मुलाकात की और सिसोदिया ने जब उन्हें बताया कि सरकार ने उनके वेतन के लिए राशि एमसीडी को भेज दी है तो उन्होंने हड़ताल खत्म करने पर सहमति भी जताई थी।

दिलीप ने बताया, "अधिकतर कर्मचारी मंगलवार को काम पर लौट चुके हैं। लेकिन राजनीतिक वजहों से कर्मचारियों का एक गुट अभी भी हड़ताल पर है।"

इस बीच मंगलवार को सफाई कर्मियों का एक गुट वेतन न मिलने के मुद्दे पर हड़ताल पर चला गया। एमसीडी कर्मचारियों के संघ के महासचिव राजेंद्र मेवाती ने आईएएनएस से कहा कि मंगलवार को हड़ताल पर बैठे कर्मचारियों में सफाई कर्मी, इंजीनियर, अध्यापक और माली शामिल हैं।

उन्होंने बताया कि एमसीडी कर्मचारियों को पिछले चार महीने से वेतन नहीं मिला है।

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