9 साल के बच्चे की हत्या करने पर नाबालिगों को उम्रकैद

मध्य प्रदेश के झाबुआ में मंगलवार को एक सत्र अदालत ने दो नाबालिग आरोपियों को एक किशोर की हत्या करने के आरोप में उम्रकैद की सजा सुनाई। माना जा रहा है कि जुवेनाइल जस्टिस (बच्चों की देखभाल और संरक्षण) एक्ट, 2015 के तहत दिया गया यह इस तरह का पहला फैसला है। कोर्ट ने जब फैसला सुनाया तो दोनों नाबालिग आरोपी सजा समझ नहीं पाए और अपनी वकील प्रतिभा सोनी से पूछने लगे, “मडम कितने दिन की सजा हुई है?” प्रतिभा सोनी ने द इंडियन एक्सप्रेस को बताया, “मैं उन्हें विस्तार से नहीं बताना चाहती थी इसलिए मैंने उन्हें कहा कि लंबी सजा हुई है। और उनसे सुधार गृह में अच्छा बर्ताव करने को कहा।”

इन दोनों लड़कों को पिछले साल 6 दिसंबर को कक्षा-9 के छात्र राधु नाना पालिया की दिन दहाड़े हत्या करने के आरोप में हिरासत में लिया गया था। झाबुआ शहर के अयोध्या बस्ती में रहने वाले 14 साल का पालिया स्कूल से अपने घर लौट रहा था जिस समय दो नाबालिगों ने चाकू मारकर उसकी हत्या कर दी। हत्या करने वालों में से एक की उम्र 16 साल और दूसरे की 17 साल है। इन्वेस्टिगेटिव ऑफिसर आरसी भाष्कर ने कहा कि दोनों आरोपियों ने बच्चे से पैसे मांगे थे, उसने देने से मना किए तो उन्होंने बच्ची की गर्दन और पेट में आठ बार चाकू मारा। जिला अभियोजन अधिकारी एसएस खिंची ने कहा कि स्कूल से निकाले गए दोनों नाबालिग आरोपी पहले से अपराध करते आ रहे हैं और वह ड्रग्स लेने के आदी थे। अधिकारी ने बताया कि हत्या वाले दिन भी उन्हें ड्रग्स खरीदने के लिए पैसे चाहिए थे, जो वह बच्चे से लूटना चाहते थे।

आरसी भाष्कर ने कहा, “बच्चे के हॉस्पिटल में मौत हो गई थी। मौत दर्दनाक थी और जुर्म खौफनाक। हमने अगले ही दिन आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया, जिनके पास से खून में सने कपड़े और दो चाकू बरामद हुए।” उन्होंने कहा कि घटना के बाद से इलाके के लोगों में गुस्सा था। स्थानीय लोग चाहते थे कि पुलिस आरोपियों को उनके हवाले कर दे। यहां तक कि आरोपियों के परिवार वालों ने भी उन्हें खुद से अलग कर दिया था। कोई भी वकील उनका केस नहीं लेना चाहता था, ऐसे उन्हें सरकारी वकील मुहैया कराई गईं। इस मामले को एडिशनल डिस्ट्रिक्ट कोर्ट के सामने पेश किया गया। जहां न्यायाधीश ए.ए खान ने जुवेनाइल जस्टिस की आईपीसी धारा 302, 15 और 16 के तहत दोनों किशोरों को उम्रकैद की सजा सुनाई है। ये ऐसा पहला मामला है जब किसी किशोर को गंभीर अपराध करने के लिए वयस्क अपराधी की तरह सजा दी गई है।