मप्र : जनहित याचिका में पर्याप्त दस्तावेज नहीं, 50 हजार का जुर्माना

जबलपुर:  मध्यप्रदेश के कटनी जिले में हुए हवाला कांड की केंद्रीय जांच ब्यूरो से जांच कराने और तत्कालीन पुलिस अधीक्षक गौरव तिवारी के तबादले को चुनौती देते हुए दायर की गई जनहित याचिका में पर्याप्त दस्तावेज न होने पर जबलपुर उच्च न्यायालय की कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश राजेंद्र मेनन और न्यायाधीश एच.पी. सिंह की युगलपीठ ने याचिकाकर्ताओं पर 50 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। ज्ञात हो कि पिछले दिनों कटनी जिले में लगभग 500 करोड़ के हवाला कारोबार का खुलासा होने के बाद तत्कालीन पुलिस अधीक्षक गौरव तिवारी का छिंदवाड़ा तबादला कर दिया गया था। इसी को लेकर कटनी जिले के जनपद अध्यक्ष कन्हैया तिवारी तथा राजेश सौरभ नायक की तरफ से उच्च न्यायालय में याचिका दायर की गई।

याचिकाकर्ता के अधिवक्ता सौरभ शर्मा के मुताबिक, उच्च न्यायालय में दायर याचिका में कहा गया कि कटनी में हुए पांच सौ करोड़ रुपये के हवालाकांड की जांच तत्कालीन पुलिस अधीक्षक गौरव तिवारी द्वारा की जा रही थी। मामले की जांच के लिए पुलिस अधीक्षक ने एसआईटी का गठन किया था।

याचिका में आरोप लगाया गया कि हवाला कारोबारियों के दबाव में जांच को प्रभावित करने के उद्देश्य से तिवारी का तबादला किया गया है, जबकि छह माह पूर्व ही उनकी पदस्थापना कटनी में हुई थी। याचिका में मामलें की जांच सीबीआई से कराए जाने की मांग की गई थी।

उप महाधिवक्ता स्वपनिल गांगुली ने संवादताओं को बताया कि कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश मेनन और न्यायाधीश एच.पी. सिंह की युगलपीठ ने गुरुवार को याचिका की सुनवाई करते हुए पाया कि याचिका पर्याप्त दस्तावेज के बिना दायर की गई है। याचिका के साथ थाने में दर्ज प्राथमिकी की प्रति तक नहीं है। इतना ही नहीं, न्यायालय में सुनवाई से पहले ही याचिका की प्रति मीडिया तक पहुंच गई। सिर्फ प्रचार के लिए जनहित याचिका दायर करने पर युगलपीठ ने याचिकाकर्ताओं को फटकार लगाई।

युगलपीठ ने याचिका खारिज करते हुए याचिकाकर्ताओं पर पचास हजार रुपये का जुर्माना लगाया। युगलपीठ ने बार काउंसिल को भी निर्देशित किया कि वे ऐसे मामलों पर नजर रखें, जो बिना किसी तथ्य और तैयारियों के न्यायालय में पेश किए जा रहे हैं।

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