बुंदेलखंड पैकेज में धांधली पर योजना आयोग सख्त

भोपाल, 16 मार्च (आईएएनएस)| बुंदेलखंड की हालात बदलने के लिए मंजूर विशेष पैकेज की बंदरबांट का खुलासा होने के बाद योजना आयोग का रुख सख्त हो चला है। उसके तल्ख तेवरों के चलते ही मध्य प्रदेश के राज्य योजना आयोग ने पन्ना में हुई धांधली की शिकायतों की जांच के लिए वन विभाग को समिति गठित कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।

बुंदेलखंड क्षेत्र में मध्य प्रदेश के छह जिले छतरपुर, टीकमगढ़, पन्ना, सागर, दमोह व दतिया आते हैं। केंद्र सरकार द्वारा मंजूर किए गए विशेष पैकेज से इन जिलों में विकास कार्य कराए जा रहे हैं, मगर इनमें बड़े पैमाने पर गड़बड़ी की शिकायतें आ रही हैं। एक शिकायत तो योजना आयोग तक पहुंच गई है।

यहां बता दें कि पन्ना में जिले के उत्तर वन मंडल को वन क्षेत्रों में जल संरक्षण के लिए मंजूर की गई 12 करोड़ रुपये की राशि में गड़बड़ी के मामले चर्चा में हैं। भास्कर जन विकास स्वास्थ्य व शिक्षा विकास समिति ने सूचना के अधिकार अधिनियम के तहत जो दस्तावेज हासिल किए हैं वे सभी को चौंकाने वाले थे। जिन वाहनों से टनों पत्थर और मिट्टी ढोना दिखाया गया था, उनके नंबर दोपहिया वाहनों के निकले।

समिति के अध्यक्ष श्रीकांत दीक्षित ने पूरे प्रकरण को राज्यसभा सदस्य सत्यव्रत चतुर्वेदी के सामने लाया। चतुर्वेदी ने इस मामले से योजना आयोग को अवगत कराया। चतुर्वेदी के जरिए पहुंची शिकायत को आयोग ने गंभीरता से लिया और आयोग की सचिव सिंधुश्री खुल्लर ने एक अर्ध शासकीय पत्र राज्य योजना आयोग को लिखा और जांच की बात कही।

योजना आयोग के रुख को ध्यान में रखते हुए राज्य योजना आयोग के उपसचिव एल. एल. राजपूत ने वन विभाग के प्रमुख सचिव से जांच के लिए समिति बनाकर रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए हैं।

यहां बताना लाजिमी होगा कि राज्य में पैकेज में गड़बड़ियों के कई मामले सामने आ रहे हैं। रेन फेड अथारिटी ऑफ इंडिया के दो तकनीकी सदस्यों का दल नहर निर्माण पर सवाल उठा चुका है और उसने ग्रामीण अभियांत्रिकी सेवा को नया काम न देने तक की अनुशंसा की है।

इसी तरह निर्माण कार्य में उपयोग में लाए गए लोहे का 52 हजार रुपये प्रति किलोग्राम की दर से भुगतान तक किया गया है। यह हालात उस मंशा को पलीता लगा रहे हैं, जो समस्याग्रस्त इस इलाके को खुशहाल बनाना चाहती है।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

 

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