मप्र में मोदी राग के बीच शिवराज तान

भोपाल, 11 मार्च (आईएएनएस)| इन दिनों भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी केंद्र बिंदु बने हुए हैं और यही वजह है कि हर तरफ मोदी राग का जोर है, मगर कुछ दिग्गज मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की खूबियां गिनाकर उन्हें मोदी के करीब खड़ा करने के लिए 'शिवराज तान' छेड़ रहे हैं। इतना ही नहीं, वे मोदी के साथ शिवराज को जननेता बताकर खूब पीठ भी थपथपा रहे हैं।

भाजपा में राष्ट्रीय अध्यक्ष की कमान राजनाथ सिंह के हाथ आने के बाद पार्टी के संसदीय बोर्ड में जगह पाने को लेकर अंदर ही अंदर चल रहा संघर्ष किसी से छुपा नहीं है। भाजपा की मजबूरी यह है कि वह कुछ बड़े नेताओं के साथ राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (आरएसएस) की इच्छा की उपेक्षा नहीं कर सकती।

शुरुआत में भाजपा के संसदीय बोर्ड में मोदी व चौहान को जगह देने की बात चली, मगर दिल्ली में हुई पार्टी की राष्ट्रीय परिषद की बैठक के बाद हालात बदलने के संकेत छनकर बाहर आने लगे। मोदी को जगह देने की चर्चाओं ने जोर पकड़ा, क्योंकि राष्ट्रीय परिषद की बैठक में मोदी को जमकर सराहा गया और वे चौहान से कहीं आगे नजर आए।

मध्य प्रदेश दौरे के दौरान भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजनाथ से लेकर लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष सुषमा स्वराज तक चौहान की सराहना करने से नहीं हिचके। राजनाथ से जब चौहान को संसदीय बोर्ड का सदस्य बनाए का सवाल किया गया तो हालांकि उनका सीधा जवाब नहीं आया।

बीते दिनों शहडोल में तो पार्टी के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी ने राष्ट्रीय स्तर पर तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के काल में हुए विकास कार्यो की चर्चा करते हुए मोदी के साथ चौहान को विकास का मॉडल बताया।

सूत्रों पर भरोसा करें तो भाजपा का एक धड़ा मोदी के साथ चौहान को भी संसदीय बोर्ड में स्थान दिलाना चाहता है। ऐसा इसलिए, क्योंकि मोदी के बोर्ड में आने व चौहान के बाहर रहने से यह संदेश साफ चला जाएगा कि मोदी का हमउम्र नेता व किसी राज्य का मुख्यमंत्री उनके समकक्ष नहीं है। यही कारण है कि चौहान को भी बोर्ड में स्थान दिलाने के लिए अपरोक्ष रूप से दवाब बढ़ाने की रणनीति पर काम तेज कर दिया गया है।

रणनीति के तहत बड़े नेता चौहान को मोदी जैसी जनहितकारी येाजनाएं चलाने वाला मुख्यमंत्री बता रहे हैं। वहीं राजनाथ इस दुविधा में हैं कि अगर वह मोदी व चौहान को संसदीय बोर्ड का सदस्य बना लेते हैं तो छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री रमन सिंह को कौन सी जिम्मेदारी दी जाए।

बहरहाल, भाजपा के नेताओं में मोदी के साथ चौहान को संसदीय बोर्ड में जगह दिलाने के लिए बनाए जा रहे माहौल ने पार्टी के भीतर की खींचतान को बाहर ला दिया है। अब राजनाथ और संघ को यह तय करना है कि वे किसे बोर्ड में जगह दें, जो दूरगामी संदेश का वाहक बन सके।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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