मप्र में हर रोज 1 किसान दे रहा जान : कांग्रेस

मध्यप्रदेश के बड़े हिस्से में फिर सूखे के हालात बन रहे हैं। फसल चौपट होने और कर्ज के बोझ से दबे किसानों की आत्महत्या का सिलसिला थम नहीं रहा है। विपक्षी कांग्रेस ने आरोप लगाया कि प्रदेश सरकार के 'किसान विरोधी' रवैए के कारण बीते 127 दिनों में 117 किसानों ने आत्महत्या कर ली। इस साल मुख्यमंत्री के गृह जिले के 14 किसानों ने जान दे दी। विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह ने सोमवार को एक बयान जारी कर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान से कहा कि वे किसानों से किए वादे निभाएं और सोयाबीन की खरीदी समर्थन मूल्य पर करें। भावांतर योजना किसानों के साथ सिर्फ छलावा है।

सिंह ने कर्ज माफ करने, बिजली के बिल माफ करने और किसानों को बोनस देने की मांग करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री सूखे की भयावह स्थिति से निपटने के लिए केंद्र सरकार से तत्काल राहत राशि की मांग करें। इसके लिए अगर मुख्यमंत्री धरने या उपवास पर बैठेंगे तो वे भी इसमें उनका साथ देंगे।

नेता प्रतिपक्ष सिंह ने कहा कि आज प्रदेश के तीन चौथाई से अधिक जिलों में सूखे के हालात हैं, अभी तक सरकार ने एक भी जिला न तो सूखाग्रस्त घोषित किया है और न ही अभी तक किसी भी तरह की राहत का ऐलान किया है। पिछले एक माह में 21 किसानों ने आत्महत्या की है।

उन्होंने मुख्यमंत्री को याद दिलाया, "इसी साल 15 जून को शाजापुर, उज्जैन में आपने कहा था कि चाहे सरकार का खजाना लुट जाए, पर प्रदेश में अब सोयाबीन समर्थन मूल्य पर खरीदेंगे। हमेशा की तरह वादा करके इसे भी भूल गए?"

नेता प्रतिपक्ष सिंह ने कहा कि सरकार की किसान विरोधी नीतियों के कारण पिछले 127 दिनों में 117 किसानों ने आत्महत्या की है, जिसमें 14 किसान मुख्यमंत्री के गृह जिले के हैं। आलम यह है कि हर डेढ़ दिन में प्रदेश का एक किसान आत्महत्या कर रहा है। इससे पता चलता है कि प्रदेश का किसान किस कदर टूट चुका है।

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