मध्यप्रदेश में भी किसानों के साथ मजाक, किसी को 4 तो किसी को 17 रुपये का मुआवजा

भोपाल: उत्तर प्रदेश के बाद अब मध्यप्रदेश में भी प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के नाम पर किसानों के साथ मजाक किया गया है. यहां किसानों को 4-5 रुपये मुआवजा दिए जाने का मामला सामने आ रहा है. किसी को 4 रुपये तो किसी को 17 रुपये का मुआवज़ा मिला वह भी उस ज़िले में जहां से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने फसल बीमा की शुरुआत की थी.

पीएम मोदी ने की थी शुरुआत
फरवरी 2016 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मध्यप्रदेश के सीहोर आए थे. फसल बीमा के नाम पर बड़ा ऐलान किया. उन्होंने कहा कि अगर एक भी किसान को नुकसान हुआ तो उसे भी मुआवजा मिलेगा. पीएम ने कहा कि यह स्कीम किसानों की सभी समस्याओं का समाधान है. उन्होंने कहा कि इस स्कीम में अगर फसल बोने के बाद बारिश होती है और वह बर्बाद होता है, तो भी मुआवजा मिलेगा. उन्होंने कहा था कि जो लोग मोदी को किसान विरोधी बताते हैं, वे भी इस योजना की आलोचना का साहस नहीं कर सके. इस ऐलान के बाद किसान खुश हुए बीमा खरीदा, प्रीमियम भरा, लेकिन नतीजा तिलाड़िया के उत्तम सिंह के दो एकड़ के खेत में सोयाबीन की पूरी फसल बर्बाद हो गई थी. मुआवज़े में उन्हें मिले 17.46 रुपये, प्रीमियम भरा था 1342 रुपये का.

​नीला बाई सबसे अमीर रहीं, 194 रुपये मिले
बादामी लाल को 4.70 रुपए बीमा दावे के तौर पर मिले. सीहोर जिला के तिलारिया और रेहटी क्षेत्र के 168 किसानों की फसल पूरी तरह नष्ट हो जाने की वजह से 9863 रुपये की बीमा राहत दी गई है. सबसे अमीर नीला बाई रहीं जिन्हें 194 रुपए 24 पैसे मिले हैं. कार्यक्रम का आयोजन कर उन्हें जो सर्टिफिकेट बांटे गए, उन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के फोटो भी हैं. 22 एकड़ जमीन पर खड़ी सोयाबीन की फसल पूरी तरह चौपट होने पर 194 रुपये का क्लेम मिला. जबकि प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का लाभ लेने के लिए उन्होंने 5,220 रुपये का प्रीमियम भरा था.

सागर में भी मुआवजे का मजाक
मुआवज़े का मज़ाक सागर ज़िले में भी बना. मनोहर सिंह जैसे किसान 1800 रुपये सालाना प्रीमियम भरते थे. उड़द की फसल ख़राब हुई मुआवज़ा मिला 615 रुपए. कलेक्टर साहब जवाब देने के बजाए, सरकार की उपलब्धि गिनाते नजर आए. सागर के कलेक्टर आलोक सिंह ने कहा एक लाख चार हज़ार किसानों को बीमा मिला जो प्रदेश में नंबर-2 पर है. पंचनामा बनना है तहसीलदार को निर्देश दिए हैं जाकर देखें.

पूरे मामले राज्य के कृषि मंत्री गौरीशंकर बिसेन मुआवज़े के मज़ाक पर योजना और थ्रेशहोल्ड की परिभाषा समझाने लगे. सरकार कह रही है दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई होगी. मध्यप्रदेश सरकार के प्रवक्ता डॉ हितेश बाजपेई ने कहा प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री हमेशा किसानों की फिक्र करते हैं, जो लोग 4 रुपये, 5 रुपये के चेक पर हस्ताक्षर करते हैं उन्हें भी सोचना चाहिये. कुछ लोग मिलकर पूरी योजना की बदनामी कर रहे हैं. ये सवाल उठने चाहिये. हम पूरे मामले की जांच करेंगे दोषी अधिकारियों को बख्शा नहीं जाएगा.
उधर कांग्रेस का आरोप है सरकार को सिर्फ अपने फायदे की फिक्र है. कांग्रेस के प्रवक्ता केके मिश्रा ने कहा किसानों के साथ सरकार भद्दा मज़ाक कर रही है. मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री बार बार कहते रहते हैं, वो खेती को लाभ का धंधा बनाना चाहते हैं, लेकिन हक़ीक़त में किसानों के नुकसान तक की भरपाई नहीं हो पा रही है.

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