मप्र में अगले साल से चलेगा नदियों को बचाने का अभियान : शिवराज

मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने नर्मदा सेवा यात्रा के एक सामाजिक आंदोलन में बदलने का दावा करते हुए ऐलान किया कि अगले साल से सभी नदियों को बचाने का अभियान चलाया जाएगा। राजधानी की प्रशासनिक अकादमी में सोमवार को नदी, जल और पर्यावरण संरक्षण मंथन के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए चौहान ने कहा, "नर्मदा सेवा जीवन का मिशन है। यह राजनीतिक कर्मकांड नहीं है। नदियों, पर्यावरण और जल को बचाना सरकार और हर नागरिक का कर्तव्य है। इस काम में सरकार और समाज दोनों को साथ-साथ चलना होगा।"

चौहान ने कहा कि अगले साल से सभी नदियों को बचाने का अभियान चलेगा। यदि समाज नदियों के संरक्षण में जुट गया तो उत्कृष्ट परिणाम मिलेंगे।

उन्होंने कहा, "अब सोने का नहीं जागने का समय है। यदि नदियों को बचाने की आत्मप्रेरणा उत्पन्न हो जाए, तो लक्ष्य पूरा होने में समय नहीं लगेगा। जो देश पर्यावरण को हानि पहुंचा रहे हैं, उनकी आलोचना करने के बजाय अपना नागरिक धर्म निभाने पर ध्यान देना ज्यादा उपयुक्त है।"

नर्मदा सेवा मिशन के अंतर्गत भविष्य की कार्य योजना की रूपरेखा बताते हुए चौहान ने कहा कि अमरकंटक में 15 मई को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हाथों इसका विमोचन होगा।

उन्होंने कहा, "नर्मदा मैया शाश्वत है। उन्हें नुकसान पहुंचाने वालों को दंड मिलेगा। नर्मदा जी को जीवंत अस्तित्व में माना गया है। नर्मदा मां के जीवन के लिए हरियाली बढ़ाने, प्रदूषण रोकने के सभी कार्य किए जाएंगे। दो जुलाई को दोनों तटों पर वृहद पौधरोपण होगा।"

जलपुरुष और मैग्सेसे आवार्ड सम्मानित राजेंद्र सिंह ने कहा, "मुख्यमंत्री ने नदियों को बचाने के काम से राज, समाज और संतों को जोड़कर उल्लेखनीय काम किया है। मध्यप्रदेश सरकार ने नदी और पर्यावरण संरक्षण के वे सब काम अपने हाथ में ले लिए हैं, जो संतों द्वारा किए जाते हैं। मुख्यमंत्री चौहान ने नर्मदा सेवा यात्रा के माध्यम से न सिर्फ नर्मदा, बल्कि अन्य नदियों के संरक्षण के प्रति भी समाज को जागृत किया है।"

राजेंद्र सिंह ने कहा कि नर्मदा के साथ-साथ सहायक नदियों को भी संरक्षण की जरूरत है। सभी सहायक नदियों को जीवन देने की जरूरत है और इस काम में हृदय से जुड़ना पड़ेगा।

सिने अभिनेता जैकी श्रॉफ ने कहा, "भविष्य की पीढ़ी को देखते हुए अभी से जल चिंता करना जरूरी है। भूमि जल का स्तर लगातार नीचे गिर रहा है। मिट्टी को नुकसान हो रहा है। सबको यह सोचने की जरूरत है कि हम भविष्य के लिए कैसा पर्यावरण छोड़ना चाहते हैं।"

उन्होंने आह्वान किया कि प्रत्येक नागरिक को विशेष अवसरों पर पौधा रोपण आवश्यक रूप से करना चाहिए और यही संस्कार बच्चों को देना चाहिए। शालाओं और महाविद्यालयों में भी यही शिक्षा देनी चाहिए और पर्यावरण चेतना संपन्न नई पीढ़ी का निर्माण करना चाहिए।