मिजोरम सरकार ने गृह सचिव के सामने शरणार्थियों का मुद्दा उठाया

आइजोल: मिजोरम सरकार ने केंद्रीय गृह मंत्रालय से अनुरोध किया है कि वह त्रिपुरा के शिविर में रह रहे उन शरणार्थियों के नाम मतदाता सूची से हटाने का मुद्दा चुनाव आयोग के समक्ष रखें, जो मिजोरम नहीं जाना चाहते हैं। एक अधिकारी ने शुक्रवार को आईएएनएस को बताया, "मिजोरम के मुख्यमंत्री लल थनहवला ने बुधवार को केंद्रीय गृह सचिव अनिल गोस्वामी के साथ दिल्ली में बैठक की और मिजोरम वापस न जाने का फैसला करने वाले शरणार्थियों का नाम मतदाता सूची से हटाने जाने के संबंध में कार्रवाई करने का अनुरोध किया।"

उन्होंने कहा, "मुख्यमंत्री ने गृह सचिव से अनुरोध किया है कि वह निर्वाचन आयोग से मिजोरम के मतदाता सूची से शरणार्थियों के नाम हटाने के लिए उचित कदम उठाने की मांग करें, जो निश्चित अवधि के अंतर्गत वापस नहीं लौटना चाहते।"

अधिकारी ने कहा, "लल थनहवला ने गोस्वामी को बताया कि राज्य सरकार ने शरणार्थियों को त्रिपुरा शिविर से वापस लाने की हर संभव कोशिश की, लेकिन सरकार की कोशिशों का शरणार्थी नेताओं के एक धड़े ने अक्सर विरोध किया।"

अधिकारी ने बताया कि गृह सचिव ने मुख्यमंत्री से कहा कि एक कमेटी त्रिपुरा के शरणार्थी शिविरों का दौरा कर हालात का जायजा लेगी।

करीब 35,000 रेयांग कबायली मिजोरम के गांव में मिजो समुदाय के साथ हुई झड़प के बाद से त्रिपुरा में गत 17 वर्षो से सात अलग-अलग शिविरों में रह रहे हैं।

निर्वाचन आयोग ने अप्रैल में हुए लोकसभा चुनाव के दौरान छह शिविरों के शरणार्थियों के लिए डाक मत-पत्र के जरिये मतदान की व्यवस्था की थी।

निर्वाचन आयोग के फैसले से गैर स्वयंसेवी संस्था और छात्र संगठन में नाराजगी देखी गई थी। उन्होंने चुनाव का बहिष्कार करते हुए तीन दिवसीय मिजोरम बंद का आह्वान किया था। उनकी मांग थी कि ये शरणार्थी घर वापस आकर मिजोरम में मतदान करें।

निर्वाचन आयोग को इस बंद को देखते हुए नौ अप्रैल के जगह 11 अप्रैल को मतदान कराना पड़ा था।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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