मिजोरम में मतदान अब 11 अप्रैल को

आईजोल: मिजोरम में गैर सरकारी संगठनों और छात्र संगठनों ने लोकसभा चुनाव का बहिष्कार करते हुए सोमवार को तीन दिवसीय बंद का आह्वान किया है। इसके मद्देनजर राज्य की एकमात्र सीट पर नौ अप्रैल को होने वाला मतदान अब 11 अप्रैल को कराया जाएगा।

मिजोरम के मुख्य निर्वाचन अधिकारी अश्विनी कुमार ने आईएएनएस को बताया, "निर्वाचन आयोग ने मिजोरम की मौजूदा स्थिति पर विचार करते हुए राज्य की एकमात्र संसदीय सीट पर चुनाव की तारीख बढ़ा कर शुक्रवार कर दी है। आयोग ने सोमवार रात इस संदर्भ में निर्देश जारी किए हैं।"

उन्होंने कहा, "निर्वाचन आयोग के हालिया निर्देश को देखते हुए हम नौ अप्रैल की जगह 11 अप्रैल को चुनाव कराने की दिशा में काम कर रहे हैं।"

निर्वाचन आयोग के एक अन्य अधिकारी ने बताया कि सोमवार से मिजोरम में शुरू हुए 72 घंटे के बंद का निर्वाचन अधिकारियों की गतिविधि पर असर पड़ा है।

मिजोरम में छह स्वयंसेवी संगठनों और छात्र संगठनों ने यंग मिजो एसोसिएशन (वाईएमए) के नेतृत्व में 72 घंटे का बंद आहूत किया है और जनता से नौ अप्रैल के चुनाव का बहिष्कार करने का आह्वान किया है। इससे आम जनजीवन प्रभावित हुआ है।

मिजोरम के एक पुलिस अधिकारी ने कहा, "राज्य में अब तक किसी तरह की अप्रिय घटना की खबर नहीं है।" अधिकारी ने यह स्वीकारा कि राज्य में आम जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है।

पुलिस ने बताया कि राजधानी आईजोल व अन्य हिस्से में सरकारी और निजी कार्यालय, दुकानें, बाजार और अन्य संस्थान बंद हैं। सुरक्षा बलों के वाहनों को छोड़ कर अन्य वाहन सड़कों से नदारद हैं।

ह्रांगटुजरे विधानसभा सीट पर भी उपचुनाव अब नौ की जगह 11 अप्रैल को कराए जाएंगे।

गत विधानसभा चुनाव में मुख्यमंत्री लल थनहवला द्वारा दो सीटों पर जीत दर्ज कराने और इस सीट को छोड़ देने के बाद उपचुनाव आवश्यक हो गया था।

इस सीट पर वानलालउम्पुई चावंगथु यूडीएफ नेता एच.लल्दुहाव्मा के खिलाफ चुनाव लड़ेंगे।

वाईएमए प्रवक्ता जे.ललसैलोवा ने संवाददाताओं को बताया, "हमने निर्वाचन आयोग द्वारा त्रिपुरा में शिविरों में जनजातीय शरणार्थियों को डाक के जरिए मतदान की इजाजत देने की मांग न माने जाने पर प्रदर्शन का आयोजन किया है।"

मुख्यमंत्री ने निर्वाचन आयोग को पिछले महीने लिखे खत में शरणार्थियों को डाक के जरिए मतदान में हिस्सा लेने की अनुमति न देने का अनुरोध किया था।

मुख्यमंत्री और स्वयंसेवी संस्थाएं शरणार्थियों को मिजोरम स्थित उनके गांव भेजे जाने और उन्हें सामान्य प्रक्रिया के तहत मतदान में भागीदारी बनाए जाने की मांग कर रहे हैं।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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