मिजोरम में बंद से जनजीवन प्रभावित

आईजोल: मिजोरम में छात्र संगठनों और छह गैर सरकारी संस्थानों द्वारा बुलाए गए बंद के मद्देनजर सोमवार को राज्य में जनजीवन प्रभावित रहा। अधिकारियों ने बताया कि यह बंद त्रिपुरा में रह रहे मिजोरम शरणार्थियों को डाकपत्रों के माध्यम से मतदान करने की अनुमति दिए जाने के विरोध में चुनाव का बहिष्कार करने के उद्देश्य से बुलाया गया है। मिजोरम की एक लोकसभा सीट के लिए मतदान नौ अप्रैल को है।

एक पुलिस प्रवक्ता ने कहा कि बंद के कारण राज्य में जनजीवन प्रभावित हुआ है, लेकिन किसी भी हिस्से से अवांछित घटना घटने की सूचना नहीं मिली है।

निर्वाचन आयोग के एक अधिकारी ने कहा कि बंद के कारण राज्य भर में चुनाव अधिकारियों को आवागमन में दिक्कतें पेश आ रही हैं।

पुलिस ने कहा कि आईजोल में सभी कार्यालय, दुकानें, बाजार, और दूसरे संस्थान बंद रहे। सुरक्षा बलों के वाहनों को छोड़कर सड़कों पर दूसरे वाहनों का आवागमन पूरी तरह बंद है।

छह गैर सरकारी संस्थानों और यंग मिजो एसोसिएशन (वाईएमए) के नेतृत्व में छात्र संगठनों ने राज्य में 72 घंटों के बंद का आह्वान करते हुए लोगों से बुधवार को मतदान का बहिष्कार करने का आग्रह किया है।

वाईएमए के प्रवक्ता जे. लालसैलोवा ने संवाददाताओं से कहा, "हमें आंदोलन करना पड़ा, क्योंकि निर्वाचन आयोग ने त्रिपुरा में रह रहे जनजातीय शरणार्थियों को डाक मतपत्रों के माध्यम से मतदान की अनुमति न देने की हमारी मांग को नजरअंदाज किया।"

त्रिपुरा में पिछले 17 सालों से रह रहे रियांग जनजाति के 36,000 शरणार्थियों में से 11,500 के नाम मिजोरम की मतदाता सूची में शामिल हैं, जिनमें से 71 फीसदी शरणार्थियों ने डाक मत्रपत्र के माध्यम से बीते मंगलवार से गुरुवार के बीच मतदान किया।

कंचनपुर (त्रिपुरा) उप-प्रभाग के मजिस्ट्रेट नंतु दास ने आईएएनएस को बताया, "छह एनजीओ के समूह द्वारा आईजोल में डाक मतपत्रों की गणना में बाधा डालने की धमकी को देखते हुए निर्वाचन आयोग ने मतपत्रों की गिनती 16 मई को कंचनपुर में ही कराने का फैसला किया है।"

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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