उग्रवादियों ने बंधक को मुक्त किया, मिजोरम में तनाव खत्म

आइजॉल/अगरतला : उग्रवादियों द्वारा अपहृत दो मिजो चालकों को मुक्त कर दिए जाने के बाद पश्चिमी मिजोरम में जातीय तनाव कुछ कम हुआ है। दोनों चालकों का 23 नवंबर को अपहरण कर लिया गया था। यह जानकारी बुधवार को अधिकारियों ने दी। जातीय तनाव को देखते हुए मिजोरम के रेयांग जनजाति के कम से कम 500 लोगों ने त्रिपुरा में शरण ले रखा था। शरण लेने वालों में महिलाएं और बच्चे शामिल थे।

मिजोरम पुलिस के एक अधिकारी ने संवाददाताओं को बताया, "दो निजी वाहन चालक सांगलीआनाथंगा और लालजामलिआना को मुक्त कर दिया गया और उन्हें मंगलवार देर शाम मामित जिले में मिजोरम पुलिस की सीआईडी (विशेष शाखा) के हवाले कर दिया गया।"

दोनों अपहृतों की मुक्ति के बाद मिजो समूह ने अपनी स्वैच्छिक तलाशी अभियान बंद कर दिया है। तलाशी अभियान के कारण पश्चिमी मिजोरम के गांवों में रहने वाले जनजाति समुदाय के लोग डर के मारे 15-16 जनवरी और 18-19 जनवरी को भाग कर उत्तरी त्रिपुरा में शरण लेने चले गए।

तीसरा बंधक दीप मंडल अभी उग्रवादियों के कब्जे में है। मंडल कोलकाता के टेलीकॉम पेशेवर हैं और नोएडा की टेलीकॉम नेटवर्क सोल्यूशन के कर्मचारी हैं।

पुलिस को संदेह है कि नेशनल लिबरेशन फ्रंट ऑफ त्रिपुरा समर्थित रेयांग उग्रवादियों ने त्रिपुरा-मिजोरम-बांग्लादेश सीमा से सटे क्षेत्र से तीनों का अपहरण किया था।

उत्तरी त्रिपुरा के जिला दंडाधिकारी प्रशांत कुमार गोयल ने इससे पहले आईएएनएस से फोन पर हुई बातचीत में बताया था, "अधिकांश खौफजदा जनजातीय समुदाय के लोग अपने गांवों को लौट गए हैं और जो बचे हैं वे भी अगले कुछ दिनों में लौट जाएंगे।"

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

POPULAR ON IBN7.IN