मिजोरम में रॉक पर भारी धार्मिक संगीत

नई दिल्ली : मिजोरम में धार्मिक संगीत के प्रभुत्व के चलते यहां रॉक अलबमों की बिक्री कठिन है। यह कहना है कि बूमररैंग नामक रॉक बैंड के गायक एटीआ का। यह बैंड राज्य को देश की संगीत की मुख्यधारा में लाने का प्रयास कर रहा है।

बूमररैंग की स्थापना वर्ष 2005 में हुआ, लेकिन अब तक गृहक्षेत्र में इसका एक ही अलबम आ पाया है। इस बैंड में बूम (गिटार), जॉशुआ (बास) और रोसंगलियान (ड्रम) भी शामिल हैं।

इस सप्ताह की शुरुआत में बैंड सदस्यों संग राजधानी में प्रस्तुति दे चुके एटीआ ने आईएएनएस को बताया, "आइजोल (मिजारेम की राजधानी) में हम कई रॉक बैंड रखते हैं। लेकिन सामान्य संगीत पर चर्च के लिए गीत गाने वाले कलाकारों का वर्चस्व है। रॉक गीतों की उतनी अच्छी बिक्री नहीं होती।"

वह मानते हैं कि राज्य में धार्मिक संगीत की सफलता में धर्म महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

उन्होंने कहा, "हममें से अधिकांश इसाई हैं, इसलिए आबादी का एक बहुत बड़ा हिस्सा धार्मिक संगीत सुनता है।"

एक गायक ने कहा, "अगर लोग स्वयं अपना अलबम निकालना चाहते हैं तो उन्हें उनको स्वयं बेचना पड़ता है। आमतौर पर 10,000 प्रतियां 100 या 200 रुपये प्रति के हिसाब से बिकती हैं।"

एटीआ ने कहा, "हम सिलचर, गुवाहाटी, बेंगलुरू, मुंबई और कोलकाता सरीखी जगहों पर प्रस्तुति दे चुके हैं। लेकिन हमारे लिए दिल्ली सबसे रोमांचक जगह है। यहां हमारे बहुत से समर्थक और चाहने वाले हैं।"

एटीआ ने कहा, "हमारा पहला अलबम 'होम' है। इसमें 14 मूल गाने हैं और इन्हें हमने लिखा है। यह पिछले सप्ताह मुंबई के 'हार्ड रॉक कैफे' में जारी किया गया था।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

 

POPULAR ON IBN7.IN