महाराष्ट्र के गांव : अनूठी पहल से खुशी की लहर

सांगली (महाराष्ट्र): बुजुर्ग किसान गणेश हताड़े की खुशी की कोई सीमा नहीं है। उन्हें वे दिन याद हैं जब महाराष्ट्र के इस भाग में उन्होंने सिर्फ सूखा देखा है, लेकिन अब वह और सूखा नहीं देखेंगे। हाथ में पानी भरी बाल्टी पकड़े गणेश ने पास में बह रही धारा की ओर नम आंखों से देखते हुए कहा, "मैंने दशकों में कभी इतना शुद्ध और साफ पानी नहीं देखा। उम्मीद है कि मेरे मरने तक यह ऐसा ही रहेगा।"

गणेश पश्चिमी महाराष्ट्र के सांगली के दफानापोर गांव के रहने वाले हैं। यह गांव महाराष्ट्र उन सूखे गांवों में शामिल है जो सरकार द्वारा पानी लाने की पहल की सुविधा से लाभान्वित हुए हैं।

दफालापोर गांव क्षेत्र के 2,000 गांवों में से एक हैं जो वर्षा की कमी और लगातार सूखे से जूझ रहे हैं।

क्षेत्र का दौरा करने वाली मीडियाकर्मियों के दल ने भी देखा कि फसलों और मवेशियों की बर्बादी के अलावा सूखे के कारण भूजल स्तर में भी चिंताजनक कमी आई है।

क्षेत्र में करोड़ों रुपयों की 11 बड़ी और छोटी बांधों की परियोजनाओं के बावजूद दैनिक कष्टों से निजात नहीं मिली थी।

लेकिन मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण द्वारा 445 करोड़ रुपये की अनोखी परियोजना की पहल से ग्रामीणों और किसानों के चेहरों पर मुस्कान वापस आ गई।

सांगली के कलेक्टर डी.एस. कुशवाहा ने बताया, "इन इलाकों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए राज्य सरकार ने सूखा राहत अभियानों को लक्ष्य में रखने के बजाय एकीकृत जलग्रहण प्रबंधन कार्यक्रम चलाने का फैसला किया है।"

इस कार्यक्रम के तहत बारिश के अमूल्य जल को बचाने के लिए इन इलाकों में सीमेंट के छोटे-छोटे बांध, खेतों में छोटे-छोटे तालाब और अंत:स्रावी टैंक बनाए गए हैं।

इसके साथ ही मौजूदा जलस्रोतों पर भी काम हुआ है। पुराने बांधों और कुओं को पुनर्जीवित किया गया है। 2,200 गांवों में से 368 गांवों में स्थनीय उपलब्ध जल संसाधनों में बढ़ोतरी की गई है।

सतारा के कलेक्टर एन. रामास्वामी के अनुसार, इन उपायों से रोमांचक परिणाम आए हैं।

दाफलापोर की भूजल स्तर 2012 में -0.22 मीटर पर था जो कि इस साल बढ़कर -6.92 मीटर तक पहुंच गया है। अथापदी गांव में भूजलस्तर -0.96 मीटर से बढ़कर +0.87 मीटर पर पहुंच गया है।

पुणे के डिवीजनल कमिश्नर विकास देशमुख ने बताया, "हमने अभी तक 2000 से अधिक सीमेंट बांध बनाए हैं जो 8.50 टीएमसी क्षमता वाले हैं।"

सोलनपुर के पंढारपुर के छोटे किसान मनोहर पथारे ने बताया कि किसानों ने रबी फसल की बुआई शुरू कर दी है। इस साल अच्छी फसल होने की उम्मीद है।

पिछले साल इस परिवार को मजबूरी में गóो के खेतों में मजदूरी करनी पड़ी थी।

बदलाव के लिए अधिकारियों ने स्थानीय ग्रामीणों की स्वैच्छिक भागीदारी की योजना बनाई है।

मुख्यमंत्री कार्यालय के एक अधिकारी ने बताया, "स्थानीय लोग श्रमदान कर रहे हैं जिससे सीमेंट के बांध जल्द बनने में मदद मिली है। हमने चार महीनों में ही सीमेंट बांध तैयार कर लिए।"

मुख्यमंत्री चव्हाण अब सूखे की आशंका वाले क्षेत्रों में भी इसी तरह की योजाना चलाना चाहते हैं ताकि मौजूदा जल संसाधनों का अधिक से अधिक उपयोग किया जा सके।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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