updated 3:41 AM CST, Jan 22, 2017

महाराष्ट्र : बाढ़ में 2 बसें बहीं, 2 शव बरामद, 20 से अधिक लापता

रायगढ़ (महाराष्ट्र): मुंबई-गोवा राजमार्ग पर भारी बारिश के कारण बुधवार तड़के एक पुल ढह जाने के कारण 22 यात्रियों को ले जा रही दो बसें बाढ़ के पानी में बह गईं। घटना के बाद शुरू हुए बचाव अभियान के दौरान बचावकर्मियों ने अबतक दो लोगों के शव बरामद किए हैं और अभियान जारी है। दोनों पीड़ितों की पहचान फिलहाल नहीं हो पाई है।

राज्य सरकार, राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (एनडीआरएफ), भारतीय नौसेना और भारतीय तटरक्षक (आईसीजी), पुलिस, दमकल विभाग ने लापता यात्रियों का पता लगाने के लिए व्यापक स्तर पर हवाई व समुद्री अभियान शुरू कर दिए हैं। 

रायगढ़ की जिलाधिकारी शीतल उगाले ने कहा कि राज्य परिवहन की दो बसें लापता हैं और उनके चालकों या यात्रियों में से किसी से भी संपर्क नहीं हो पा रहा है। दोनों बसों में 11-11 यात्री सवार थे।

बसों के अतिरिक्त पांच-छह अन्य वाहन भी लापता हैं, जिनके तटीय कोंकण क्षेत्र में 18 किलोमीटर दूर अरब सागर में बह जाने की आशंका है। लापता वाहनों की हवाई, स्थलीय व समुद्र से तलाश की जा रही है।  

एक अधिकरी ने कहा कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, कई मंत्री और जिलाधिकारी शीतल उगाले स्थिति पर नजर रखे हुए हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने फडणवीस से बात की और उन्हें बचाव अभियान में मदद का प्रस्ताव दिया, वहीं रेल मंत्री सुरेश प्रभु ने रेलवे चिकित्सा दलों तथा अन्य सहायता तैनात करने का आदेश दिया है। 

आईसीजी ने बसों की तलाशी के लिए चेतक और सी किंग हेलीकॉप्टर्स सहित तीन हेलीकॉप्टरों को तैनात किया है, जबकि एनडीआरएफ के तीन विशेष दल, पुलिस, दमकल विभाग तथा नौसेना के साथ तलाशी अभियान में शामिल हो गए हैं।

दोनों बसों में से एक जयगढ़-मुंबई सेवा की बस एस.एस. कांबले चला रहे थे और इसमें कंडक्टर वी.के. देसाई थे, जबकि राजापुर-बोरीवली (उत्तर मुंबई) सेवा की बस ई.एस. मुंडे चला रहे थे और इसमें पी.बी. शिर्के कंडक्टर थे। दोनों बसें रत्नागिरी में चिपलुण बस डिपो की थीं।

दोपहर में हादसा स्थल से थोड़ी दूरी पर मुंडे का बैग बरामद किया गया, जिसमें टिफिन बॉक्स तथा अन्य सामान थे।

भारी बारिश के कारण सावित्री नदी में बाढ़ आ गई है। यह नदी महाबलेश्वरम से निकलती है और रत्नागिरी-रायगढ़ जिलों से होकर बहती है। बाढ़ के कारण महाड के पास ब्रिटिश काल में बना पुल मंगलवार रात करीब एक बजे ढह गया।

स्थानीय लोगों ने बताया कि करीब पांच से छह निजी वाहन भी लापता हैं। उन्होंने आशंका जताई कि वे वाहन बाढ़ के पानी में बह गए होंगे।

उगाले ने कहा, "पुल का निर्माण ब्रिटिशकाल में किया गया था। राष्ट्रीय राजमार्ग प्रशासन से चर्चा करने के बाद हमने यातायात पास के पुल पर स्थानांतरित कर दिया है। हम अन्य वाहनों के लापता होने की खबर की पुष्टि करने का प्रयास कर रहे हैं।"

पुनर्वास मंत्री चंद्रकांत पाटील ने कहा कि लापता वाहनों की खोजबीन के लिए हेलीकॉप्टर्स और रक्षा बलों की मदद ली जा रही है।

तटीय कोंकण और उत्तरी तथा पश्चिमी महाराष्ट्र में पिछले पांच दिनों से लगातार बारिश जारी है, जिसके चलते पिछले 24 घंटों में बारिश के कारण दुर्घटनाओं में कम से कम 12 लोग जान गंवा चुके हैं।

महाराष्ट्र के राज्यपाल सी.वी.राव ने घटना पर शोक जताया है।

इस घटना की गूंज संसद तथा महाराष्ट्र विधानसभा में सुनाई पड़ी, जहां कांग्रेस के राधाकृष्ण विखे-पाटिल तथा राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) के अजीत पवार सहित विपक्ष के कई नेता पुराने पुल को बंद न करने को लेकर सरकार पर बरसे, क्योंकि पुल अपना जीवनकाल पूरा कर चुका था।

हादसे से अवाक एमएसआरडीसी मंत्री एकनाथ शिंदे ने व्यस्त मुंबई-गोवा राजमार्ग पर सभी पुलों की संरचनात्मक सुरक्षा की जांच का आदेश दिया।

--आईएएनएस 

 

  • Agency: IANS
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