महाराष्ट्र : मुस्लिम हस्तियों को नायकों में शामिल नहीं करने पर याचिका

मुंबई: महाराष्ट्र सरकार के उस परिपत्र के खिलाफ बम्बई उच्च न्यायालय में एक याचिका दायर की गई है, जिसमें मुस्लिम हस्तियों के नाम उन राष्ट्रीय नेताओं/नायकों की सूची से गायब हैं, जिनके सम्मान में कार्यक्रमों एवं विशेष दिवसों का आयोजन होना है। राज्य सरकार ने यह परिपत्र 30 नवंबर, 2014 को जारी किया था, जिसमें उन 26 दिनों की एक सूची थी, जब राष्ट्रीय नेताओं/नायकों के सम्मान में जश्न या समारोह का आयोजन किया जाएगा।

महाराष्ट्र सरकार के खिलाफ यह याचिका वरिष्ठ कार्यकर्ता-पत्रकार सरफराज आरजू ने दायर की है। इसमें मुख्यमंत्री फडणवीस, अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री एकनाथ खड़से और राज्य अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष आमिर हुसैन को प्रतिवादी बनाया गया है।

याचिका में कहा गया, "यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि सरकार को मुस्लिम समुदाय से एक भी महान शख्सियत का नाम नहीं मिला। यह जनहित में है कि विद्यार्थी व जनता यह जानें कि भारतीय मुसलमानों ने मातृभूमि और मानवता की सेवा की है। लेकिन किन्ही कारणों से लोगों को भटके हुए कुछ मुसलमानों के बारे में जो कुछ भी जानकारी मिली, उससे 'इस्लामोफोबिया' (इस्लाम को लेकर पूर्वाग्रह व नफरत) पैदा हुआ, जो गलत है।"

याचिका में कहा गया कि महाराष्ट्र सरकार ने सूची में मौलाना अबुल कलाम आजाद जैसे स्वतंत्रता सेनानी, डॉ. जाकिर हुसैन, डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम, परमवीर चक्र से सम्मानित हवलदार मेजर अब्दुल हामिद, धर्मगुरु ख्वाजा गरीब नवाज, मौलाना शौकत अली, शाहनवाज खान, सर बदरुद्दीन तैयबजी, टीपू सुल्तान, बहादुर शाह जफर, खान अब्दुल गफ्फार खान, अशफाकुल्लाह खान और अन्य की पूरी तरह अनदेखी की।

याचिकाकर्ता सरफराज ने कहा, "मुस्लिम राष्ट्रीय नायकों को जानबूझकर भुला दिया गया और आम युवा भारतीयों को उनकी महानता व योगदान से अनभिज्ञ रखा गया है।"

उन्होंने पूर्व में फडणवीस, खड़से और अन्य को मुसलिम समुदाय के शिकवे-शिकायतों से संबंधित पत्र लिखे थे।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस। 

 

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