महाराष्ट्र कार्यदल ने किसान आत्महत्या रोकने को फार्मूला सुझाया

नागपुर: किसान समस्या के अध्ययन के लिए महाराष्ट्र सरकार द्वारा गठित कार्यदल वासानत्राओ नायक शेती स्वावलंबन मिशन (वीएनएसएसएम) ने दो सूत्रीय फार्मूले की घोषणा की है, जिसमें दावा किया गया है कि यह देश में किसानों द्वारा बढ़ती आत्महत्या की घटनाओं को रोक सकता है। यह फार्मूला उस रिपोर्ट का एक हिस्सा है, जिसमें महाराष्ट्र के सूखा प्रभावित 14 जिलों में कृषि संकट से निपटने के लिए वासानत्राओ नायक शेती स्वावलंबन मिशन ने आवश्यक उपाय सुझाए हैं। 

मिशन के अध्यक्ष किशोर तिवारी ने शनिवार को बताया कि इस फार्मूला के दो भाग हैं। पहला तनाव से निपटने के लिए और दूसरा कृषि संकट के प्रमुख मुद्दों से निपटने के लिए। 

पहले भाग में खाद्य और स्वास्थ्य सुरक्षा उपलब्ध कराने की सिफारिश की गई है, मौजूदा नेटवर्क के भीतर कृषि ऋण के लिए बेहतर सुविधा, प्रत्येक किसान को बिजली और पानी का कनेक्शन, किसानों के बच्चों के लिए शिक्षा उपलब्ध कराना खासतौर से ऐसे क्षेत्रों में जहां किसान परेशान हैं। 

इसके अलावा इसमें महात्मा गांधी ग्रामीण रोजगार गारंटी कानून के तहत ज्यादा रोजगार मुहैया कराना, मुद्रा योजना का प्रभावी क्रियान्वयन और दूसरे सरकारी कल्याणकारी योजनाओं में विभिन्न स्तरों पर भ्रष्टाचार को कम करना शामिल है। 

इसके दूसरे भाग में कृषि संकट के मूल मुद्दों पर ध्यान दिया गया है, जिसे तिवारी अफसरशाही के कुप्रबंधन का नतीजा मानते हैं। 

मिशन ने मौजूदा भूमि की स्थिति, नमी, पानी की उपलब्धा में समग्र और टिकाऊ कृषि की सिफारिश की है व सूखा प्रभावित क्षेत्रों में उचित तरह के फसलों की सिफारिश की है। 

पिछले छह महीनों से ज्यादा समय से मिशन ने किसानों को अपनी लागत में 40 फीसदी से ज्यादा कमी लाने की सलाह है। इसके तहत बीजों का चुनाव, खाद इत्यादि का चुनाव और व्यापारियों और बाजार के मध्यस्थों द्वारा शोषण से बचने की सलाह दी है।

तिवारी ने आईएएनएस को बताया, "आम बजट आनेवाला है, जिसके बाद राज्यों के बजट आएंगे। हमने राज्य और केंद्र सरकार से अपने सुझावों पर गंभीरता से अमल करने की सिफारिश की है, ताकि किसानों के आखों के आंसू पोछे जा सकें। "

आनेवाले गर्मियों में महाराष्ट्र के कई इलाकों में पानी के संकट की खबरें आ रही हैं, जिनमें मराठवाड़ा और विदर्भ भी शामिल है, जहां मिशन काम कर रहा है। इससे किसानों की चिंताएं और बढ़ गई हैं। 

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस। 

 

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