केरल लाटरी में सब कुछ ठीक नहीं : सीएजी

केरल की सरकारी लाटरी को 1967 में शुरू होने से लेकर कभी घाटा नहीं हुआ है, लेकिन सीएजी की ताजा रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि विभाग में सबकुछ ठीक तरह से नहीं चल रहा है।

मंगलवार को जारी रिपोर्ट में नियंत्रक एवं महालेखाकार ने 2006 से 2011 तक की लेखा अवधि को शामिल किया है। इसमें कई दावेदारी, विजेता टिकटों के मुद्रण में गलती और पुष्टि नियंत्रण के अभाव समेत गलतियां पाई गई हैं।

सामाने आए सबसे आश्चर्यजनक मामले में ओनम बंपर लाटरी 2011 के दूसरे विजेता का है जिसमें टिकट नंबर टीएच 339602 है, लेकिन असली विजेता नंबर आईआर 339602 था।

जब प्रकाशित टिकट का धारक पुरस्कार लेने पहुंचा तब विभाग को गलती का अहसास हुआ। दावेदार को दावे का भुगतान नहीं होने से हुई मानसिक पीड़ा को ध्यान में लेते हुए सरकार ने उसे 2 लाख रुपये विशेष अनुग्रह के तौर पर दिए।

सीएजी ने कहा है, "विभाग ने कहा है कि यह चूक कंप्यूटर पद्धति में पैदा हुई और सही परिणाम अपलोड करना सुनिश्चित किया जा रहा है।"

सीएजी ने टिप्पणी की है, "यह तथ्य बरकरार है कि गलत दावेदार को मानसिक पीड़ा हुई और उसके परिणामस्वरूप विभाग को 2 लाख रुपये का भुगतान करना पड़ा।"

सरकार के मुताबिक केरल लाटरी की बिक्री बहुत ज्यादा बढ़ चुकी है और 2500 करोड़ टिकटों की बिक्री तक पहुंचने की उम्मीद है। लाटरी के 40000 अधिकृत एजेंट हैं और 100,000 खुदरा बिक्रेता हैं। इन लोगों का जीवन लाटरी के टिकटों की बिक्री पर निर्भर है।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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