उच्च न्यायालय ने पुलिस अधिकारी के बचाव पर केरल सरकार को लताड़ा

केरल उच्च न्यायालय ने गुरुवार को एक महीने के भीतर दूसरी बार एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी को बचाने के लिए राज्य सरकार की खिंचाई की। मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति नवनीति प्रसाद सिंह की एक खंडपीठ ने अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक तोमिन जे. थाचेंकेरी से संबंधित मामले के बारे में विवरण दाखिल करने के लिए सरकार द्वारा 10 दिन का और वक्त मांगने पर अपनी नाराजगी जताई।

न्यायालय ने जून में ही विवरण मांगा था।

विलंब पर अपनी नाराजगी जताते हुए पीठ ने पूछा कि क्या यह समय इसलिए मांगा जा रहा है, ताकि इस दौरान केरल के वर्तमान पुलिस प्रमुख टी. पी. सुकुमार सेवानिवृत्त हो जाएं।

न्यायालय ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 28 जून की तारीख मुकर्रर की और अगले बुधवार से पहले थाचेंकेरी से संबंधित तमाम विवरण दाखिल करने के लिए कहा।

मामला एक सामाजिक कार्यकर्ता ने एक जनहित याचिका के माध्यम से उठाया है, जिसमें थाचेंकेरी की पुलिस मुख्यालय में अचानक नियुक्ति पर सवाल उठाए गए हैं।

मई महीने में सर्वोच्च न्यायालय के आदेश पर सेनकुमार को दोबारा राज्य पुलिस प्रमुख के पद पर बहाल करने से कुछ दिन पहले थाचेंकेरी को मुख्यालय में नियुक्त किया गया था।

न्यायालय ने यह जानना चाहा है कि क्या थाचेंकेरी की नियुक्ति सेनकुमार पर नजर रखने के लिए की गई है? उच्च न्यायालय ने कहा कि अगर ऐसा है, तो इसे रद्द किया जाना चाहिए।

याचिकाकर्ता ने इस ओर ध्यान दिलाया है कि थाचेंकेरी के खिलाफ कुछ मामले लंबित हैं और न्यायालय ने इस पर हलफनामा दाखिल करने को कहा है।

पिनाराई विजयन के मई 2016 में सत्ता में आते ही सेनकुमार को पद से हटाने का फैसला लिया गया। अपने पद पर दोबारा बहाली के लिए सेनकुमार को 11 महीने तक कानूनी लड़ाई लड़नी पड़ी।

सेनकुमार 30 जून को सेवानिवृत्त होंगे।

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