केरल की इन तीन कंपनियों के पास है अॉस्ट्रेलिया, सिंगापुर, स्वीडन और बेल्जियम से ज्यादा सोना

केरल की तीन बड़ी गोल्ड लोन कंपनियों का सोना पिछले दो वर्षों में 195 टन से बढ़कर 263 टन हो गया है। यह आंकड़ा सितंबर 2016 तक का है। अगर तुलना करें तो इन कंपनियों के खजाने में कई देशों से ज्यादा सोना है। मुत्थूट फाइनेंस, मन्नापुरम फाइमेंस और मुत्थूट फिनकॉर्प के पास मिलाकर 263 टन की गोल्ड जूलरी है जो बेल्जियम, सिंगापुर, स्वीडन और अॉस्ट्रेलिया के स्वर्ण भंडार से ज्यादा है। विश्व में सोने की करीब 30 प्रतिशत मांग भारत में है। वहीं अकेले केरल में करीब 2 लाख लोग गोल्ड इंडस्ट्री में काम करते हैं।

टाइम्स अॉफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक  दो साल पहले मुथूट फाइनैंस के पास 116 टन (1,16,000 किलो) सोना था जो अब 150 टन (1,50,000 किलो) हो गया है। यह दुनिया के अमीर देशों में शुमार सिंगापुर (127.4 टन), स्वीडन (125.7), ऑस्ट्रेलिया (79.9 टन), कुवैत (79 टन), डेनमार्क (66.5 टन) और फिनलैंड (49.1 टन) के पास रिज़र्व के रूप में रखे सोने से भी ज़्यादा है। भारत में सोना रखने के मामले में मणप्पुरम फाइनैंस और मुथूट फिनकॉर्प भी बड़े खिलाड़ी हैं। इनके पास क्रमशः 65.9 और 46.88 टन सोना रखा है। इन तीनों कंपनियों के पास कुल 262.78 टन सोना रखा है।

वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के मुताबिक, गोल्ड रिज़र्व रखने के मामले में भारत दुनिया में ग्यारहवें स्थान पर आता है। अमेरिका इस मामले में सबसे आगे है। उसके पास 8,134 टन सोना रिज़र्व में रखा है। वहीं जर्मनी और आईएमएफ (इंटरनैशनल मॉनिटरी फंड) के पास क्रमशः 3,378 और 2,814 टन सोना है।

गोल्ड फील्ड्स मिनरल सर्विसेज़ (GFMS) के गोल्ड सर्वे के मुताबिक, भारत सोने का उपभोग करनेवाले देशों में सबसे ऊपर है। साल 2016 के तीसरे तिमाही तक यहां 107.6 टन सोने की खपत हुई। तुलनात्मक रूप से इसी समय में पूरे यूरोप और नॉर्थ अमेरिका में सिर्फ 67.1 टन सोना खरीदा-बेचा गया। इस मामले में चीन दूसरे नंबर पर है। यहां 98.1 टन सोने की खपत हुई।