पद्मनाभस्वामी मंदिर में महिलाओं के चूड़ीदार पहनने को मंजूरी का विरोध

 

तिरुवनंतपुरम:  केरल स्थित श्री पद्मनाभस्वामी मंदिर में सलवार-कमीज तथा चूड़ीदार पहनकर आने वाली महिला श्रद्धालुओं को भगवान का दर्शन करने की मंजूरी देने के एक दिन बाद कुछ महिलाएं चूड़ीदार पहने साइड गेट से मंदिर में प्रवेश करती दिखाई दीं, लेकिन कुछ श्रद्धालुओं व मंदिर के अधिकारियों ने अन्य दरवाजों से ऐसी वेशभूषा वाली महिलाओं को प्रवेश देने पर आपत्ति जताई। मंदिर के कार्यकारी अधिकारी के.एन.सतीश ने कहा कि केरल उच्च न्यायालय ने एक याचिका की सुनवाई के आधार पर उन्हें चूड़ीदार पहनकर आने वाले श्रद्धालुओं को मंदिर में प्रवेश देने का फैसला लेने को कहा था और मंगलवार को अदालत के समक्ष लिए गए अपने फैसले पर वह कायम हैं।

सतीश ने कहा, "जिला न्यायाधीश तथा मंदिर की प्रशासनिक कमेटी के अध्यक्ष के.हरिपाल ने मुझे एक पत्र लिखा था, लेकिन उसमें कई बातें अस्पष्ट हैं। मैं अपने निर्णय पर कायम हूं।"

मंदिर में चार प्रवेश मार्ग हैं। कुछ महिलाएं एक दरवाजे से चूड़ीदार ड्रेस पहने मंदिर में दाखिल हुईं, जबकि कुछ श्रद्धालुओं तथा मंदिर अधिकारियों ने अन्य दरवाजों से सलवार-कमीज व चूड़ीदार पहने महिलाओं को मंदिर में दाखिल नहीं होने दिया।

यह मंदिर साल 2011 में तब अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियों में आया, जब पता चला कि मंदिर में एक लाख करोड़ रुपये से अधिक का खजाना रखा हुआ है।

इस मंदिर में भगवान का दर्शन करने जाने वाली महिलाओं को साड़ी या धोती पहनकर जाना होता है, जो मंदिर का रिवाज है। इस रीति को महिला अधिवक्ता रिया राजी ने अदालत में चुनौती दी थी।

परंपरा में अचानक किए गए बदलाव से आक्रोशित श्रद्धालुओं ने गणेश के नेतृत्व में विरोध-प्रदर्शन किया और सड़क पर यह कहते हुए बैठ गए कि केवल एक व्यक्ति द्वारा परंपरा नहीं बदली जा सकती।

गणेश ने संवाददाताओं से कहा, "हरिपाल ने इस बात से आश्वस्त किया था कि बदलाव को आगे नहीं बढ़ाया जाएगा और वह एक आदेश लेकर आएंगे। इसके बाद हमने विरोध-प्रदर्शन का फैसला किया।"

इस बीच, राज्य के मंत्री तथा मार्क्‍सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के नेता कदाकमपल्ली सुरेंद्रन ने मुद्दे की आलोचना करते हुए कहा कि समय को ध्यान में रखते हुए कई जगहों पर बदलाव किए गए हैं।

सुरेंद्रन ने कहा, "मुझे नहीं पता कि प्रदर्शन का कारण क्या है? खैर, सरकार मुद्दे को देखेगी।"

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