नक्सलियों के मारे जाने पर विवाद, शव सोमवार तक सुरक्षित रखे गए

 

कोझीकोड: केरल पुलिस ने कहा है कि जंगल में गोलीबारी में दो नक्सली मारे गए, जबकि मानवाधिकार कार्यकर्ताओं का कहना है कि यह फर्जी मुठभेड़ थी। मारे गए नक्सलियों के दोस्तों और रिश्तेदारों ने पुलिस पर सोमवार शाम तक शवों को सुरक्षित रखने के लिए दबाव डाला।

पुलिस के एक शीर्ष अधिकारी के अनुसार, केरल राज्य की कमांडो फोर्स केरल थंडरबोल्ट्स निलांबुर के गहरे जंगल में गश्त लगा रही थी।

दोनों नक्सलियों ने पुलिस पर पहले गोलीबारी की, जिसके जवाब में पुलिस ने गोली चलाई।

दोनों की पहचान कोप्पम देवराजन और जीता उर्फ कावेरी के रूप में की गई है।

इनके शव को शुक्रवार रात कोझिकोड मेडिकल कॉलेज अस्पताल लाया गया और शनिवार को दोनों शवों का अंत्यपरीक्षण किया गया।

इन दोनों के नजदीकी रिश्तेदार और दोस्त मानवाधिकार कार्यकर्ताओं के एक समूह के साथ अस्पताल पहुंचे और इसे फर्जी मुठभेड़ बताते हुए न्याय की मांग की। इन मानवाधिकार कार्यकर्ताओं में केरल के जाने-माने मानवाधिकार कार्यकर्ता अईनूर वासु भी थे।

वासु ने कहा, "यह मुठभेड़ नहीं, फर्जी मुठभेड़ थी और हमलोग जो कुछ हुआ, उसकी न्यायिक जांच की मांग करते हैं।"

उन्होंने कहा कि पुलिस को इन्हें शांत कराने में मुश्किल हो रही थी, इन्हें हिरासत में लिया और दो घंटे बाद छोड़ दिया।

देवराजन के रिश्तेदारों में उसकी बूढ़ी मां भी है। रिश्तेदारों का कहना है कि उनका उससे पिछले 30 वर्षो से कोई संपर्क नहीं था।

केरल में सत्तारूढ़ वाम लोकतांत्रिक मोर्चा सरकार की दूसरी सबसे बड़ी घटक भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी ने पुलिस कार्रवाई की निंदा की है।

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष वी.एम. सुधीरन ने पूरे प्रकरण की न्यायिक जांच की मांग की है और केरल प्रदेश मानवाधिकार आयोग ने राज्य पुलिस को मामले की जांच कर एक रपट पेश करने को कहा है।

  • Agency: IANS