सहकारी बैंक मुद्दे पर संयुक्त विरोध का प्रयास करेंगे : माकपा

तिरुवनंतपुरम:  केरल में सत्तारूढ़ मार्क्‍सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) ने रविवार को कहा कि वह सहकारी बैंकों को दरकिनार करने के केंद्र के फैसले के खिलाफ अन्य दलों के साथ मिलकर आंदोलन करने का प्रयास करेगी। ऐसा नहीं हुआ तो वह नरेंद्र मोदी सरकार के नोट बंदी के कदम के बाद अपनाए गए इस रुख का अकेले ही विरोध करेगी।

मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने आगे की रणनीति पर विचार करने के लिए बुलाई गई सर्वदलीय बैठक के एक दिन पहले ही प्रदेश माकपा सचिव कोडियेरी बालाकृष्णन ने कहा कि मोदी सरकार का कदम राज्य के लिए कुल मिलाकर अहितकर है और यदि सभी संयुक्त रूप से विरोध करने के लिए सहमत होते हैं तो इसे शुरू किया जाएगा।

पार्टी की बैठक की अध्यक्षता करने के बाद बालाकृष्णन ने संवाददाताओं से कहा कि यदि संयुक्त विरोध के मुद्दे पर कोई दूसरी राय बनती है तो तब माकपा केंद्र सरकार के सहकारी बैंकों को दरकिनार करने के केंद्र सरकार के कदम के मुकाबले के लिए अपनी कार्ययोजना बनाएगी।

केरल में कांग्रेस के अंदर शनिवार को तब दरार पैदा हो गई है जब प्रदेश के पार्टी प्रमुख वी. एम. सुधीरन ने शनिवार को अन्य नेताओं की इच्छा के खिलाफ सत्तारूढ़ माकपा के नेतृत्व वाले वाम लोकतांत्रिक मोर्चा के साथ मिलकर विरोध प्रदर्शन की संभावना से इनकार कर दिया।

500 और 1000 रुपये के बंद किए गए नोटों को स्वीकार करने या बदलने के लिए जारी अभियान से सहकारी बैंकों को अलग रखा गया है।

केरल में सहकारी बैंकों में त्रिस्तरीय व्यवस्था है। वहां 1600 प्राथमिक सहकारी बैंक हैं जो 14 जिला सहकारी बैंक से जुड़े हैं। ये फिर केरल राज्य सहकारी बैंक से जुड़ा है। इन कुल सहकारी बैंकों में एक लाख करोड़ रुपये से अधिक हैं।

केरल में सहकारी बैंकों की स्थिति ग्रामीण इलाकों में बहुत अच्छी है क्योंकि पैसा जमा करने वाले को अपना पैन नंबर नहीं देना होता।

  • Agency: IANS
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