कावेरी पर बांध के समर्थन में कर्नाटक बंद

 Bengaluru : Busy markets and roads wore a deserted look as various Kannada organisations called a day long state-wide bandh protesting against the Mekedatu Drinking Water project in Bengaluru on April 18, 2015. (Photo: IANS) Bengaluru : Busy markets and roads wore a deserted look as various Kannada organisations called a day long state-wide bandh protesting against the Mekedatu Drinking Water project in Bengaluru on April 18, 2015. (Photo: IANS)

बेंगलुरू: कर्नाटक के मेकेदातू में कावेरी नदी पर बांध बनाए जाने के समर्थन में शनिवार को 12 घंटे का कर्नाटक बंद जारी है। इस बांध से पुराने मैसूर क्षेत्र को बिजली व पेयजल उपलब्ध कराने की योजना है। एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने आईएएनएस से कहा, "बंद शांतिपूर्ण ढंग से जारी है। शहर में कार्यकर्ताओं द्वारा कुछ ढाबों व दुकानों को जबरदस्ती बंद कराने की घटनाएं सामने आई हैं।"

कर्नाटक की राजधानी से 100 किलोमीटर दूर कनकपुरा तालुका के मेकेदातू में कावेरी नदी पर कर्नाटक सरकार द्वारा बांध बनाए जाने का तमिलनाडु विरोध कर रहा है।

लगभग 70 कन्नड़ संगठनों व स्थानीय पार्टियों द्वारा बंद का आह्वान किया गया है, जिसका असर पुराने मैसूर से लेकर बेंगलुरू, रामानगरा, मांड्या तथा मैसूर जिले में देखा जा रहा है। इससे सामान्य जनजीवन खासा प्रभावित हुआ है। शहर के स्कूल, कॉलेज, बाजार, होटल, मॉल, पेट्रोल पंप तथा थियेटर बंद हैं।

कन्नड़ वेदिके परिषद तथा कन्नड़ फिल्म बिरादरी के सैकड़ों कार्यकर्ता, कन्नड़ चलावाली वाटाल पक्ष (केसीवीपी) तथा विभिन्न सामाजिक व सांस्कृतिक संगठन कड़ी सुरक्षा में फ्रीडम पार्क में चलने वाले दिन भर के प्रदर्शन में हिस्सा ले रहे हैं।

महिलाओं सहित लगभग 10 हजार लोगों ने परियोजना के समर्थन में एक जुलूस निकाला और बिना किसी क्षेत्राधिकार के इस परियोजना का विरोध करने के लिए तमिलनाडु सरकार की आलोचना की।

केसीवीपी के अध्यक्ष वाटाल नागराज ने जोर देते हुए कहा, "इस परियोजना का विरोध करने का तमिलनाडु सरकार के पास नैतिक या कानूनी तौर पर कोई अधिकार नहीं है, क्योंकि यह जगह हमारे राज्य के भीतर है और इसका उद्देश्य कनकपुरा तथा रामानगरा सहित बेंगलुरू के शहरी तथा ग्रामीण इलाकों में बिजली तथा पेयजल मुहैया कराना है।"

सरकार को हालांकि इस बांध के निर्माण के लिए पर्यावरण मंजूरी लेनी अभी बाकी है।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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