कन्नड़ लेखक अनंतमूर्ति का निधन, राष्ट्रपति ने जताया शोक

बेंगलुरू: प्रसिद्ध कन्नड़ लेखक यू.आर. अनंतमूर्ति का 82 साल की उम्र में निधन हो गया। वह पिछले कुछ समय से बीमार थे। राष्ट्रपति व प्रधानमंत्री ने उनके निधन पर शोक जताते हुए कहा कि साहित्य में अमूल्य योगदान के लिए उन्हें हमेशा किया जाएगा। मूर्ति का निधन शुक्रवार को यहां एक निजी अस्पताल में हुआ। उन्हें पिछले सप्ताह बुखार एवं संक्रमण के बाद अस्पताल में भर्ती कराया गया था।

मणिपाल अस्पताल के प्रवक्ता ने संवाददाताओं से कहा कि उनकी खराब हालत को देखते हुए उन्हें जीवन रक्षक प्रणाली पर रखा गया और डायलिसिस भी किया गया, लेकिन गुर्दा खराब हो जाने के कारण वह ठीक नहीं हो सके।

अनंतमूर्ति के घर में उनकी पत्नी ईस्थर और बेटा शरत तथा बेटी अनुराधा हैं। राज्य सरकार ने उनके निधन पर तीन दिन के शोक की घोषणा की है। साथ ही तीन दिन तक स्कूल एवं कॉलेज भी बंद रखने के निर्देश दिए गए हैं।

अनंतमूर्ति का जन्म 22 दिसंबर, 1932 को मालनाड क्षेत्र के शिमोगा जिले में थर्थाहाली के नजदीक हुआ था। उन्हें वर्ष 1994 में ज्ञानपीठ अवार्ड से सम्मानित किया गया था। साहित्य के क्षेत्र में उनके अमूल्य योगदान को देखते हुए वर्ष 1998 में उन्हें पद्म भूषण से भी नावाजा गया।

अनंतमूर्ति की कई पुस्तकों का विभिन्न भारतीय और यूरोपीय भाषाओं में अनुवाद किया गया है। मैसूर विश्वविद्यालय में अंग्रेजी के प्रोफेसर के रूप में अपने अध्यापन करियर की शुरुआत करने वाले अनंतमूर्ति कई विश्वविद्यालयों में विभिन्न पदों पर रहे।

राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अनंतमूर्ति के निधन पर शोक जताया है। अपने शोक संदेश में राष्ट्रपति ने कहा, "राष्ट्र साहित्य के क्षेत्र में अनंतमूर्ति के अमूल्य योगदान को हमेशा याद रखेगा।"

वहीं, प्रधानमंत्री मोदी ने कहा है, "यू.आर. अनंतमूर्ति का निधन कन्नड़ साहित्य का बड़ा नुकसान है। मेरी संवेदना उनके परिवार के साथ है। ईश्वर उनकी आत्मा को शांति दें।"

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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