मैसूर के भव्य दशहरा पर्व में शामिल हुए हजारों श्रद्धालु

मैसूर: कर्नाटक की सांस्कृतिक राजधानी मैसूर में विश्व प्रसिद्ध दशहरा पर्व सोमवार को धूमधाम के साथ संपन्न हुआ। मैसूर के इस भव्य दशहरा उत्सव को देखने लाखों की संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंचे, जिसमें विदेशी पर्यटकों की भी बड़ी संख्या में मौजूद थे। बुराई पर सच्चाई की जीत के रूप में मनाया जाने वाला विजयदशमी पर्व के अवसर पर सुसज्जित हाथियों के नेतृत्व में यह भव्य पर्व वोडेयार राजघराने के अंबी विलास महल से शुरू हुआ।

वोडेयार राजघराने के वंशज श्रीकांतदत्त एवं उनके परिवार वालों की उपस्थिति में दर्जनों धर्माचार्यो ने देवी चामुंडेश्वरी की अर्चना के साथ इस पारंपरिक दशहरा उत्सव की शुरुआत की।

दशहरा कर्नाटक के राजकीय पर्व के रूप में मनाया जाता है। सुसज्जित शाही हाथी अर्जुन पर रखे 750 किग्रा. के सिंहासन पर देवी चामुंडेश्वरी को स्थापित करने के बाद इस अवसर पर मुख्यमंत्री सिद्धरमैया ने देवी की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित किए।

प्रतिमा को लेकर अर्जुन परंपरा के अनुसार नगर के प्रमुख हिस्सों से होते हुए महल से पांच किमी दूर बानी मंडप मैदान पहुंचा।

अतीत की भव्यता को दोहराते हुए लगभग एक मील लंबे जुलूस में विभिन्न रंगों से सजे दर्जनों हाथी, ऊंट एवं घोड़ों पर तैनात घुड़सवार, नृत्य करने वाली मंडलियां, झूमते गाते लोगों का समूह और बेहद खूबसूरत 42 रंगीन झांकियों ने राज्य की संस्कृति एवं परंपरा को पुनर्जीवित कर दिया।

इस अवसर पर दशहरा के भव्य समारोह को शांतिपूर्वक संपन्न कराने के लिए पूरे नगर में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे।

दशहरा उत्सव के जुलूस वाले मार्ग पर 600 पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया था, तथा प्रत्येक चौराहे पर सीसीटीवी लगाए गए थे।

एक मानवरहित यान को जुलूस मार्ग की निगरानी के लिए आकाश में तैनात किया गया।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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