मैसूर में 10 दिवसीय दशहरा उत्सव की तैयारी पूरी

मैसूर: कर्नाटक की सांस्कृतिक राजधानी मैसूर में दशहरा के अवसर पर मनाए जाने वाले दस दिवसीय भव्य उत्सव की तैयारी पूरी हो चुकी है। यह उत्सव सोमवार से शुरू होगा। बुराई पर सच्चाई के विजय के प्रतीक रूप में मनाया जाने वाले इस पर्व पर हाथियों को सच्चाई का प्रतीक मानकर उन्हें विभिन्न रंगों से सुसज्जित किया जाता है।

विजयदशमी से पहले राज्य की राजधानी बेंगलुरू से 140 किमी. दूर यह नगर धार्मिक उत्सव के रंग में सराबोर हो जाता है।

इस अवसर पर मैसूर के वोडेयार राजघराने के वंशज श्रीकांत दत्ता नरसिम्हाराजा ने पारंपरिक रीतियों के अनुसार शहर के मध्य में स्थित सैकड़ों पर्ष पुराने अम्बी विलास महल के राजदरबार में शाही शस्त्रागार की पूजा-अर्चना की।

शाही वेशभूषा एवं राजा का मुकुट धारण किए 60 वर्षीय नरसिम्हाराजा ने वैदिक मंत्रों के बीच पारंपरिक आयुध पूजा संपन्न की।

इस पारंपरिक शाही पूजन की एक झलक पाने के लिए शाही परिवार के सदस्यों के साथ-साथ सैकड़ों की संख्या में नगरवासी राजदरबार में इकट्ठा हुए।

वोडेयार राजघराने के शाही शस्त्रागार में लगभग में 1000 से भी ज्यादा बहुमूल्य शस्त्र मौजूद हैं, तथा उनमें से कुछ तो 14वीं शताब्दी के हैं।

मैसूर की इस अति प्रचीन उत्सव का लुत्फ लेने के लिए देश के विभिन्न हिस्सों से हजारों की संख्या में पर्यटक हर वर्ष आते हैं, इनमें बहुत बड़ी संख्या विदेशी पर्यटकों की भी होती है, जो हाथियों की साज-सज्जा एवं झांकी देखने यहां आते हैं।

सोमवार से शुरू हो रहे इस उत्सव का उद्घाटन महल पर मुख्यमंत्री सिद्धारमैया करेंगे। इसके बाद विभिन्न रंगों एवं आभूषणों से सुसज्जित हाथियों की शहर के मुख्य हिस्सों से होते हुए पांच किमी. लंबी जुलूस निकाली जाएगी।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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