झारखंड : निजीकरण में दखल की प्रधानमंत्री से सांसदों की मांग

झारखंड के 10 सांसदों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर केंद्रीय भारी उद्योग मंत्रालय द्वारा हैवी इंजीनियरिंग कार्पोरेशन (एचईसी) का निजीकरण करने के फैसले में दखल करने की मांग की है। साल 1958 में स्थापित एचईसी भारत के सबसे पुराने उपक्रमों में से एक है। 10 सांसदों द्वारा प्रधानमंत्री को भेजे पत्र के अनुसार, "एचईसी भारत की सबसे पुरानी सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों में से एक है। हजारों किसानों ने इसके लिए अपनी जमीनें दी थी। इसके निजीकरण की यह साजिश है। निजीकरण से बेरोजगारी बढ़ेगी।"

निजीकरण का विरोध करने वाले सभी सांसद भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के हैं। उन्होंने एचईसी के आधुनिकीकरण की भी मांग की।

मांग करने वाले सांसदों में रामटहल चौधरी, बी.डी. राम, रविंद्र राय, करिया मुंडा, महेश पोद्दार, रविंद्र पांडे, लक्ष्मण गिलुवा, सुनील सिंह, पी.एन. सिंह और विद्युत बरन महतो शामिल हैं।

रांची से सांसद रामटहल चौधरी ने बताया कि शुक्रवार को वह भारी उद्योग मंत्री अनंत गीते से भी मिलेंगे।

सांसदों के अनुसार, एचईसी के निजीकरण का फैसला अगली कैबिनेट बैठक में लिया जा सकता है।

झारखंड में अन्य राजनीतिक पार्टियों और ट्रेड यूनियनों ने भी एचईसी के निजीकरण का विरोध किया है।

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