झारखंड : बजट सत्र में गूंजेगा भूमि कानूनों में संशोधन का मुद्दा

 

रांची:  झारखंड विधानसभा के मंगलवार से शुरू हो रहे बजट सत्र के हंगामेदार होने की संभावना है। इस सत्र में विपक्षी पार्टियां भूमि अधिनियम में संशोधन और खदान पट्टों के मामले को उठाने की तैयारी में हैं। झारखंड विधानसभा का शीतकालीन सत्र मुख्यमंत्री रघुवर दास के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार के दो भूमि अधिनियमों, छोटा नागपुर काश्तकारी अधिनियम (सीएनटी) और संथाल परगना अधिनियम (एसपीटी) के संशोधन के विरोध में पहले ही हंगामे की भेंट चढ़ चुका है।

इन संशोधनों को बिना चर्चा के विधानसभा सत्र के दौरान विपक्षी पार्टियों के कड़े विरोध के बावजूद ध्वनिमत से पारित कर दिया गया। दोनों अधिनियमों में संशोधन से अब कृषि भूमि का इस्तेमाल बुनियादी ढांचों सहित गैर-कृषि उद्देश्यों के लिए किया जा सकेगा।

बजट सत्र की शुरुआत 17 जनवरी से होगी। विपक्षी पार्टियों ने कहा कि वे सत्र में दोनों भूमि अधिनियमों के मुद्दे को उठाएंगी। इसे सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) 'एक बंद अध्याय' बता रही है लेकिन विपक्ष इस मुद्दे को छोड़ने के मूड में नहीं दिखाई देता।

झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के कार्यकारी अध्यक्ष हेमंत सोरेन ने संवाददाताओं से कहा, "सीएनटी और एसपीटी में संशोधन का मुद्दा समाप्त नहीं हुआ है। झामुमो इस मुद्दे पर पीछे नहीं हटेगा। इसके अलावा दूसरे मुद्दे भी हैं जिन्हें बजट सत्र के दौरान उठाया जाएगा।"

उन्होंने कहा, "इसमें बिगड़ती कानून व्यवस्था की स्थिति, पंचायतों को नकदी रहित बनाने के झूठे दावे भी उठाए जाएंगे।"

कांग्रेस ने भी कहा कि वह भूमि अधिनियमों में संशोधनों और खनन पट्टों के नवीनीकरण के मुद्दे को उठाएगी।

झारखंड कांग्रेस के अध्यक्ष और विधायक सुखदेव भगत ने संवाददाताओं से कहा, "नोटबंदी का असर, कानून और व्यवस्था की स्थिति और दूसरे मुद्दों को भी उठाया जाएगा।"

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