हिमाचल की सार्वजनिक क्षेत्र की कम्पनियां घाटे में

शिमला, 19 मार्च (आईएएनएस)| हिमाचल प्रदेश की सार्वजनिक क्षेत्र की कम्पनियों (पीएसयू) ने मार्च 2012 तक 2,188 करोड़ रुपये का घाटा दर्ज किया है। राज्य विधानसभा के चालू बजट सत्र में पेश एक रिपोर्ट में कहा गया है कि वर्ष 2011-12 के आखिर तक पीएसयू का समग्र घाटा 2,188 करोड़ रुपये तक पहुंच गया, जो मार्च 2011 तक 1,666 करोड़ रुपये था।

रिपोर्ट में कहा गया है कि 20 पीएसयू में से 12 घाटे में हैं। बाकी कम्पनियों को भी आलोच्य वर्ष में मामूली फायदा हुआ है।

रोचक बात यह है कि इसी अवधि में इन पीएसयू में सरकारी निवेश 1,877 करोड़ रुपये से बढ़कर 2,022 करोड़ रुपये हो गया।

राज्य के सबसे बड़े उपक्रम, हिमाचल प्रदेश राज्य विद्युत बोर्ड को सर्वाधिक 1,406 करोड़ रुपये का घाटा हुआ, जिसमें 2010-11 के दौरान हुआ 512 करोड़ रुपये का घाटा भी दर्ज है। बोर्ड के पास 25 हजार से अधिक कर्मचारी हैं।

हिमाचल प्रदेश सड़क परिवहन निगम को कुल 653 करोड़ रुपये का घाटा हुआ। 31 मार्च 2011 तक निगम का घाटा 572.79 करोड़ रुपये था, जबकि 2010 में यह 230.06 करोड़ रुपये था। निगम के पास 1,900 से अधिक बसें हैं।

हिमाचल प्रदेश पर्यटन विकास निगम का कुल घाटा 16.77 करोड़ रुपये रहा, जबकि निगम ने कहा था कि राज्य में पर्यटकों का सालाना आगमन 2012 में 1.6 करोड़ का आंकड़ा पार कर गया था।

मुख्यत: सेब के सांद्र रस का विपणन करने वाली हिमाचल प्रदेश बागवानी उपज विपणन एवं प्रसंस्करण निगम (एचपीएमसी) का घाटा 69.94 करोड़ रुपये है। राज्य के वन निगम और राज्य के हस्तकरघा और हस्तशिल्प निगम को क्रमश: 35.82 करोड़ रुपये और 20.38 करोड़ रुपये का घाटा हुआ है।

लाभ वाली पीएसयू में प्रमुख रही आवास एवं शहरी विकास प्राधिकरण (हूडा), जो 127.32 करोड़ रुपये लाभ में है।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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