फोन टैपिंग मामला : वीरभद्र ने लगाए आरोप, धूमल ने किया खंडन

शिमला, 12 मार्च (आईएएनएस)| हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने मंगलवार को, राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल पर अपने कार्यकाल के दौरान बड़ी संख्या में राजनीतिज्ञों तथा नौकरशाहों के फोन टेप कराने के आरोप लगाए। धूमल ने वीरभद्र के आरोपों का खंडन किया।

मुख्यमंत्री ने पत्रकारों से कहा, "धूमल जब राज्य के मुख्यमंत्री थे, तब तत्कालीन पुलिस महानिदेशक डी.एस. मन्हास, उनके उत्तराधिकारी आई.डी. भंडारी तथा कुछ अन्य पुलिस अधिकारी उनकी सहायता कर रहे थे।"

उन्होंने आगे कहा, "धूमल चूंकि तब गृह मंत्री भी थे, लिहाजा उनके फोन टेपिंग में शामिल होने का यह स्पष्ट संकेत है।"

वीरभद्र ने कहा कि कांग्रेस के शासनकाल में कभी फोन टेप नहीं किए गए। उन्होंने बताया, "धूमल के मुख्यमंत्रित्वकाल में ही ऐसी छुद्र घटना हुई। जब मैं विपक्ष में था, तब हिमाचल भवन (चंडीगढ़ तथा दिल्ली में स्थित राज्य अतिथि गृह) के मेरे कमरे तक में माइक्रोफोन लगाए गए।"

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ऐसे समय में फोन टेपिंग का विवरण नहीं दे सकती। उन्होंने कहा, "सतर्कता जांच आयोग द्वारा इस मामले की जांच पूरी हो जाने के बाद सरकार इस मामले के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज कराएगी तथा जरूरी कार्रवाई करेगी।"

दूसरी ओर धूमल ने अपना बचाव करते हुए पत्रकारों से कहा कि फोन टेपिंग मामले पर राज्य की जनता को गुमराह करके कांग्रेस स्थिति का राजनीतिक फायदा उठाना चाहती है।

उन्होंने ध्यान दिलाया कि इससे पहले वीरभद्र सिंह के मुख्यमंत्रित्वकाल में मुख्य सचिव तथा एक राजनेता के बीच हुई बातचीत को टेप करवाया गया था।

पूर्व मुख्यमंत्री धूमल ने कहा कि सरकार को उच्च न्यायालय के किसी न्यायाधीश से मामले की जांच करवानी चाहिए।

पिछले सप्ताह मुख्यमंत्री ने कहा था कि 1,371 फोन टेप करवाए गए थे। जबकि गृह विभाग ने सिर्फ 170 फोन टेप करने की इजाजत दी थी।

गैर कानूनी फोन टेपिंग के समय सीआईडी के प्रमुख रहे भंडारी को पिछले महीने हटा दिया गया।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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