हिमाचली बच्चे को बौद्ध भिक्षु के अवतार का दर्जा

केलांग (हिमाचल प्रदेश): हिमाचल प्रदेश में लाहौल घाटी के एक छोटे से गांव में किसान दम्पति के करीब ढाई साल के बच्चे की पहचान एक बौद्ध भिक्षु के अवतार के रूप में की गई है, जो करीब 500 साल पुराने एक मठ के प्रमुख थे। यह मठ जम्मू एवं कश्मीर के लद्दाख क्षेत्र में लेह शहर के नजदीक स्थित है, जो तागना मठ के रूप में प्रसिद्ध है। इसे लद्दाख क्षेत्र के धार्मिक इतिहास में सर्वाधिक महत्वपूर्ण माना जाता है। बच्चे को तागना मठ के 15वें प्रमुख के रूप में विभूषित किया गया है।

हिमालयी बौद्ध सांस्कृतिक एवं संरक्षण समिति के मुख्य संरक्षक रवि ठाकुर ने आईएएनएस से कहा कि यह बच्चा बौद्ध भिक्षु व तागना मठ के 14वें प्रमुख तागना रिनपोछे का अवतार माना जा रहा है, जिनका जनवरी 2011 में स्वर्गवास हो गया था।

ठाकुर, जो स्थानीय विधायक भी हैं, ने कहा कि मठ के 50 से अधिक भिक्षु बुधवार को बच्चे के घर पहुंचे और यह सुनिश्चित करने के लिए धार्मिक अनुष्ठान किया कि वह बच्चा रिनपोछे का अवतार ही है। उन्होंने कहा, "बच्चे ने 14वें रिनपोछे के रूप में खुद से संबंधित वस्तुओं की पहचान की।"

बच्चे के पिता नवांग चेरिंग ने इस पर खुशी जताते हुए कहा, "हमें खुशी हो रही है कि हमारे बेटे को प्रख्यात मठों में से एक की सेवा करने का मौका मिला।"

बच्चे को बौद्ध भिक्षु का अवतार बताए जाने के बाद दूर-दराज के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में लोग उसका आशीर्वाद लेने तागना मठ पहुंचे।

मठ के अधिकारियों ने कहा कि बच्चा शुरुआत के कुछ वर्षो तक मठ में ही रहेगा। बाद में उसे धार्मिक प्रशिक्षण केंद्र भेजा जाएगा।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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